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UPI यूजर्स ध्यान दें! सरकार का बड़ा ऐलान, क्या सच में लगने वाला है हर ट्रांसफर पर शुल्क?

Free UPI Payment: UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क की खबरों के बीच केंद्र सरकार का बड़ा बयान: आम नागरिकों और P2P ट्रांसफर के लिए UPI पूरी तरह फ्री रहेगा। मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर भी कोई आम बदलाव नहीं।

अर्पित शुक्ला

UPI Transaction Charges Clarification: केंद्र सरकार ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बीच शनिवार को स्पष्ट किया कि यूपीआई से भुगतान करने वाले आम नागरिकों से किसी भी तरह का ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार ने कहा है कि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले सभी यूपीआई ट्रांजैक्शन भी पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे। साथ ही, व्यापारियों के लिए भी यूपीआई के अधिकांश ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि भविष्य में यदि व्यापारी छूट दर (एमडीआर) लागू की जाती है, तो यह केवल कुछ सीमित प्रकार के व्यापारी ट्रांजैक्शन पर, एक निश्चित सीमा से अधिक राशि होने की स्थिति में और बेहद मामूली दर पर लागू होगी। यह दर डेबिट या क्रेडिट कार्ड से लिए जाने वाले शुल्क की तुलना में काफी कम होगी। सरकार ने कहा कि सभी व्यापारियों पर एक समान शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं है।

यूपीआई पर लगेगा शुल्क?

मंत्रालय के अनुसार, कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने के बाद भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन किया जाएगा। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अध्यक्षता वाली यूपीआई एवं सेवा संचालन समिति यह तय करेगी कि एमडीआर लागू किया जाना है या नहीं और यदि लागू होता है तो उसकी दर क्या होगी।

वित्त मंत्रालय ने आगे स्पष्ट किया कि भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम (पीएसएस एक्ट) में हालिया संशोधन को लेकर कुछ गलत धारणाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों द्वारा इसे आम नागरिकों से यूपीआई शुल्क वसूलने की दिशा में कदम बताया जा रहा है, जबकि वास्तव में यह संशोधन एक सक्षमकारी प्रावधान है, जिसका उद्देश्य यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता, तकनीकी विकास, वित्तीय समावेशन और उभरते जोखिमों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है।

यूपीआई भविष्य में भी मजबूत बने

बयान में आगे कहा गया है कि यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम और डिजिटल ढांचे को लगातार उन्नत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत है। इसके लिए एक ऐसा आर्थिक ढांचा आवश्यक है, जिससे यूपीआई भविष्य में भी मजबूत और विश्वसनीय बना रहे।

सरकार ने कहा कि यूपीआई के क्षेत्र में अधिक कंपनियों को अपनी सेवाएं बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा, और इसके लिए लंबे समय तक टिकाऊ आय मॉडल की आवश्यकता है।

सरकारी सब्सिडी पर्याप्त नहीं

सरकार का कहना है कि केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना यूपीआई के विकास के अगले चरण के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए ऐसा संतुलित ढांचा तैयार करना जरूरी है, जिससे यूपीआई मजबूत, समावेशी, किफायती और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बना रहे।

सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि यूपीआई से संबंधित नीतिगत बदलावों के पीछे किसी बाहरी प्रभाव या दबाव की भूमिका हो सकती है। सरकार ने इसे पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया।

बाहरी दबाव का प्रभाव नहीं

वित्त मंत्रालय ने आगे बयान में कहा कि यदि किसी बाहरी दबाव का प्रभाव होता, तो भारत ने वर्ष 2016 में यूपीआई की शुरुआत नहीं की होती। इसके अलावा, जनवरी 2020 से नागरिकों और व्यापारियों के लिए यूपीआई को निःशुल्क रखने की व्यवस्था भी लागू नहीं की जाती। सरकार के अनुसार, इन्हीं प्रयासों के कारण यूपीआई आज दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय में काम करने वाली परस्पर-संचालित भुगतान प्रणाली बन चुकी है।

सरकार ने बताया कि वर्ष 2016-17 में शुरुआत के बाद यूपीआई ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को व्यापक रूप से बदल दिया है। वास्तविक समय में भुगतान और विभिन्न बैंकों एवं सेवाओं के बीच परस्पर संचालन की सुविधा के कारण यूपीआई आज दुनिया के लिए डिजिटल भुगतान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन चुका है।

2026 में 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में अकेले यूपीआई के माध्यम से 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनका कुल मूल्य करीब 29.9 लाख करोड़ रुपए रहा। यूपीआई अब 11 विदेशी देशों में भी सक्रिय है, जबकि कई अन्य देशों ने भी इस तकनीक में रुचि दिखाई है। सरकार ने कहा कि भारत अब डिजिटल भुगतान के विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। यूपीआई को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक और व्यापक रूप से पहुंचाने तथा वैश्विक स्तर पर इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखने के लिए पूरे यूपीआई तंत्र का आर्थिक रूप से टिकाऊ होना जरूरी है।

भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में किया गया संशोधन इसी दिशा में एक दूरदर्शी कदम है, जिसका उद्देश्य यूपीआई को आने वाले वर्षों में भी सुरक्षित, किफायती, समावेशी और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय भुगतान प्रणाली बनाए रखना है।

आम लोगों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा

केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यूपीआई नागरिकों के लिए निःशुल्क बना रहेगा और रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन पर आम लोगों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। भविष्य में यदि एमडीआर लागू किया जाता है, तो वह केवल सीमित व्यापारी ट्रांजैक्शन पर और मामूली दर पर लागू होगा। सरकार ने कहा कि यूपीआई भारत का अपना डिजिटल नवाचार है, जिसे भारतीयों ने भारत के लिए विकसित किया है। सरकार ने पिछले एक दशक में इसे बढ़ावा देने और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया है और आगे भी इसके विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि यूपीआई से संबंधित जानकारी के लिए केवल वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और बिना सत्यापन वाले संदेशों को आगे साझा न करें। -एजेंसी इनपुट के साथ

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