QR को लेकर हो रहा फोड। (सौ. Freepik) 
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गिफ्ट पैकेज के बहाने नया QR कोड स्कैम, FBI ने किया अलर्ट

QR Code Brushing Scam: ऐसा पैकेज गिफ्ट जिसे आपने ऑर्डर ही नहीं किया? FBI ने चेतावनी दी है कि यह “QR कोड ब्रशिंग स्कैम” का नया तरीका है, जिसके जरिए साइबर ठग लोगों को जाल में फंसा रही है।

सिमरन सिंह

QR Code Scam: क्या आपने कभी ऐसा पैकेज गिफ्ट में पाया है, जिसे आपने ऑर्डर ही नहीं किया? अगर हां, तो सावधान हो जाइए। FBI ने चेतावनी दी है कि यह “QR कोड ब्रशिंग स्कैम” का नया तरीका है, जिसके जरिए साइबर ठग लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। इस स्कैम में स्कैमर्स एक पैकेज गिफ्ट के रूप में भेजते हैं, जिसमें QR कोड छिपा होता है और भेजने वाले की पहचान भी उजागर नहीं होती। अक्सर लोग बिना सोचे-समझे पैकेट खोल देते हैं और जैसे ही QR कोड स्कैन करते हैं, ठगों का शिकार बन जाते हैं।

कैसे काम करता है यह स्कैम?

FBI के अनुसार, इस स्कैम का सबसे बड़ा हथियार QR कोड है। पैकेट खोलते ही जैसे ही कोई व्यक्ति QR कोड स्कैन करता है, उसके फोन में या तो मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है या फिर यूजर से पर्सनल और बैंकिंग डिटेल्स मांगी जाती हैं। एक बार डिटेल्स साझा करते ही स्कैमर्स आसानी से यूजर के डेटा और पैसों तक पहुंच बना लेते हैं।

पर्सनल डिटेल्स पर है निशाना

FBI ने बताया कि इन गिफ्ट पैकेजेस का मकसद सिर्फ यूजर्स की संवेदनशील जानकारी चुराना है। कई मामलों में QR कोड स्कैन करने के बाद डिवाइस में खतरनाक वायरस इंस्टॉल हो जाता है, जिससे मोबाइल का पूरा डेटा हैकर्स के पास चला जाता है। हालांकि अभी तक ऐसे बहुत ज्यादा मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन एजेंसी का कहना है कि लोगों को सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

क्या है ब्रशिंग स्कैम का नया वर्जन?

इस ट्रिक को ब्रशिंग स्कैम का अपडेटेड रूप माना जा रहा है। पहले ठग फर्जी पैकेज भेजकर ऑनलाइन रिव्यू और ऑर्डर हिस्ट्री के जरिए लोगों को धोखा देते थे, लेकिन अब वे QR कोड का सहारा लेकर लोगों को क्लिक करने और डिटेल्स साझा करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। FBI के मुताबिक, यह तरीका और भी खतरनाक है क्योंकि इसमें लोगों की प्राइवेसी और बैंकिंग जानकारी सीधे खतरे में पड़ जाती है।

कैसे बचें इस स्कैम से?

  • किसी भी अनजान पैकेज को बिना जांचे न खोलें।
  • अनजाने QR कोड को कभी स्कैन न करें।
  • अगर गिफ्ट पैकेज पर सेंडर की जानकारी न हो, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
  • डिवाइस में भरोसेमंद एंटीवायरस और सिक्योरिटी ऐप इंस्टॉल रखें।
  • संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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