LPG Alternative: भारत के किचन में वर्षों से LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) का इस्तेमाल होता आ रहा है, लेकिन अब एक नया विकल्प तेजी से चर्चा में है DME (डाइमिथाइल ईथर)। इसे LPG का संभावित विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल सस्ता है बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर और देश में ही तैयार किया जा सकता है। जहां LPG के लिए भारत को बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहना पड़ता है, वहीं DME घरेलू संसाधनों से बनाया जा सकता है।
DME एक सिंथेटिक फ्यूल है, जो LPG की तरह ही काम करता है। इसे लिक्विड फॉर्म में स्टोर किया जाता है और गैस की तरह किचन में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह जलने पर बेहद कम प्रदूषण फैलाता है। वैज्ञानिक इसे "फ्यूचर-रेडी" फ्यूल मानते हैं, क्योंकि यह क्लीन एनर्जी कैटेगरी में आता है। दिलचस्प बात यह है कि DME को कचरे, पराली, बायोमास और इंडस्ट्रियल उत्सर्जन से भी तैयार किया जा सकता है, जिससे यह पर्यावरण के लिए और भी फायदेमंद बन जाता है।
DME की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह मौजूदा LPG इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ आसानी से काम कर सकता है। यानी घरों में गैस स्टोव, पाइपलाइन या सिलेंडर बदलने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा, इसकी परफॉर्मेंस भी LPG के लगभग बराबर मानी जाती है, इसलिए यूजर्स को इस्तेमाल में ज्यादा फर्क महसूस नहीं होगा। यही वजह है कि इसे आम लोगों के लिए एक किफायती और आसान विकल्प माना जा रहा है।
DME को LPG के मुकाबले ज्यादा क्लीन फ्यूल कहा जाता है। यह जलने पर ना के बराबर कालिख और जहरीला धुआं छोड़ता है। इसका सीधा फायदा यह है कि किचन साफ रहता है और बर्तनों पर काली परत नहीं जमती। साथ ही, हवा में प्रदूषण भी कम होता है, जिससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है।
भारत अभी LPG के लिए बड़े स्तर पर आयात पर निर्भर है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है। लेकिन DME को देश के अंदर ही कोयला, बायोमास और अन्य संसाधनों से बनाया जा सकता है। इससे न सिर्फ आयात कम होगा, बल्कि विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। यह कदम भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में DME को LPG के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। मौजूदा सिलेंडर में करीब 20% तक DME ब्लेंड किया जा सकता है और इसके लिए किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं होगी। इसका मतलब है कि आम लोग बिना किसी परेशानी के धीरे-धीरे इस नए फ्यूल को अपनाने लगेंगे।