DeepFake तकनीक ने हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके नकारात्मक पहलू भी तेजी से सामने आ रहे हैं। (सौ. AI) 
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DeepFake तकनीक से हो सकती है जिंदगी खराब, आधुनिक तकनीक का खतरनाक चेहरा

जिसका उपयोग अब साइबर अपराधी कर रहे हैं। इस तकनीक से किसी व्यक्ति की छवि या वीडियो को आपत्तिजनक सामग्री में बदलकर उसका दुरुपयोग किया जा सकता है।

सिमरन सिंह

नवभारत टेक डेस्क: तकनीक ने हमारी जिंदगी को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके नकारात्मक पहलू भी तेजी से सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे खतरनाक है डीपफेक तकनीक, जिसका उपयोग अब साइबर अपराधी कर रहे हैं। इस तकनीक से किसी व्यक्ति की छवि या वीडियो को आपत्तिजनक सामग्री में बदलकर उसका दुरुपयोग किया जा सकता है।

महिलाओं और मशहूर हस्तियों को अधिक निशाना

विशेष रूप से महिलाओं की तस्वीरों और वीडियो का दुरुपयोग डीपफेक तकनीक के जरिए हो रहा है। इसका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग, बदनामी और झूठी खबरें फैलाने के लिए किया जा रहा है। राजनेताओं और सेलिब्रिटीज के फर्जी वीडियो बनाकर उनकी छवि को खराब करने के मामले भी सामने आए हैं।

वित्तीय धोखाधड़ी में डीपफेक का उपयोग

यह तकनीक सिर्फ छवि खराब करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग फर्जी पहचान, वित्तीय धोखाधड़ी, और डिजिटल अपराध में भी हो रहा है।

डीपफेक से बचाव के उपाय

1. निजी जानकारी साझा करने से बचें:

  • अपनी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते समय सतर्क रहें।

2. प्राइवेसी सेटिंग्स अपडेट करें:

  • अपनी प्रोफाइल को प्राइवेट करें और प्राइवेसी लॉक का उपयोग करें।

3. साइबर सुरक्षा ऐप्स का इस्तेमाल:

  • एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर और डीपफेक पहचानने वाले टूल्स जैसे Deepware और Sensity AI का उपयोग करें।

4. अनजान लिंक से बचें:

  • किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांच लें।

5. साइबर क्राइम विभाग से संपर्क करें:

  • अगर आपको अपनी छवि या डेटा के दुरुपयोग का संदेह हो, तो तुरंत साइबर अपराध विभाग से सहायता लें।

जागरूकता और सख्त कानून जरूरी

डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए साइबर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, सरकार और संबंधित एजेंसियों को इस पर नियंत्रण पाने के लिए कड़े कानून लागू करने चाहिए।

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