विनेश फोगाट  (सोर्स - सोशल मीडिया)
खेल

विनेश फोगाट को विश्व चैंपियनशिप ट्रायल में मौका देने पर हाई कोर्ट ने WFI से मांगा जवाब

Vinesh Phogat WFI Trial: विनेश फोगाट को 2026 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप चयन ट्रायल में शामिल करने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ से जवाब मांगा है। सुनवाई जारी है।

सृष्टि मौर्य

Vinesh Phogat Delhi High Court Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को भारतीय कुश्ती महासंघ से पूछा कि क्या पहलवान विनेश फोगाट को 2026 सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने डब्ल्यूएफआई के वकील से इस मुद्दे पर निर्देश लेने को कहा है। अदालत ने फोगाट के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई में अंतिम फैसला फिलहाल रोकने की उनकी मांग पर भी डब्ल्यूएफआई से निर्देश लेने को कहा।

फोगाट ने नई अर्जी में क्या डाला?

फोगाट ने अपनी लंबित याचिका में नई अर्जी दाखिल की है। इसमें उन्होंने गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और उसके बाद की रिकवरी के कारण खेल से दूर रहने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए प्रतिस्पर्धी खेलों में वापसी की एक निष्पक्ष और तय प्रक्रिया बनाने की मांग की है।

फोगाट ने डब्ल्यूएफआई के 7 सितंबर के सर्कुलर को भी चुनौती दी है। इसमें 2026 सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के चयन ट्रायल के लिए पात्रता के नियम तय किए गए हैं। चैंपियनशिप कजाकिस्तान के अस्ताना में 24 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होनी है।

फोगाट की क्या मांगें है?

फोगाट की मांग है कि उन्हें अस्थायी रूप से पात्र खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया जाए और 14 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में होने वाले महिला चयन ट्रायल में हिस्सा लेने दिया जाए। फोगाट का कहना है कि डब्ल्यूएफआई के नए नियम उन खिलाड़ियों के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं देते, जो गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और रिकवरी के कारण जरूरी प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकीं।

उनके वरिष्ठ वकील राजशेखर राव ने अदालत में कहा कि मातृत्व के कारण खेल से दूर रहना किसी महिला खिलाड़ी को चयन प्रक्रिया से बाहर करने का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि फोगाट किसी विशेष छूट की मांग नहीं कर रही हैं, बल्कि निष्पक्ष मौका चाहती हैं।

पहले भी अदालत पहुंच चुका है मामला

ये पहली बार नहीं है जब फोगाट के चयन को लेकर मामला अदालत पहुंचा है। 2026 एशियन गेम्स के चयन ट्रायल में भी उन्हें नए नियमों के तहत शुरुआत में बाहर रखा गया था। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी।

हाई कोर्ट ने उस समय कहा था कि मातृत्व को किसी महिला खिलाड़ी को पेशेवर अवसर से दूर रखने का आधार नहीं बनाया जा सकता। डब्ल्यूएफआई ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने फोगाट को ट्रायल में हिस्सा लेने दिया, लेकिन हाई कोर्ट की कुछ टिप्पणियों पर चिंता जताई और सभी कानूनी मुद्दों को खुला रखा।

मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में भी लगी रोक

डब्ल्यूएफआई ने 9 मई को फोगाट को 15 पन्नों का कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें अनुशासनहीनता, एंटी-डोपिंग नियमों और अंतरराष्ट्रीय कुश्ती नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोप लगाए गए थे। फोगाट को 26 जून तक डब्ल्यूएफआई से मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से भी रोक दिया गया था।

फोगाट का कहना है कि उनके खिलाफ कार्रवाई तब शुरू की गई, जब अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी ने उन्हें 1 जनवरी 2026 से प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दे दी थी। अब विश्व चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने का उनका मामला दिल्ली हाई कोर्ट के सामने है।

Weather Alert: ओडिशा में रेड अलर्ट, छत्तीसगढ़-झारखंड समेत 12 राज्यों में भारी बारिश, 60 Kmph तक चलेंगी हवाएं

गोविंद बल्लभ पंत: आजादी की लड़ाई से यूपी के पहले मुख्यमंत्री तक, राष्ट्र निर्माण में निभाई अहम भूमिका

5 राज्यों के चुनाव में BJP को ₹1,473 करोड़ का चंदा, कांग्रेस से 7 गुना ज्यादा; जानें कहां कितना किया खर्च

गांधीनगर में बड़ा हादसा, स्लैब गिरने से मचा हड़कंप, मलबे में दबे 10 लोग; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Chidambaram vs PM Modi: दिमागी नक्सल कहे जाने पर चिदंबरम ने क्यों जताई खुशी? नाराज फूफा पर भी किया पलटवार