पार्थिव पटेल ने वीवीएस लक्ष्मण के बढ़ते प्रभाव के कारण चयनकर्ता पद के लिए नहीं किया आवेदन
बजट बढ़कर 19.35 करोड़ रुपये हुआ, पर 100 टेस्ट खेल चुके 2 दिग्गजों ने प्रस्ताव ठुकराया।
प्रज्ञान ओझा को अजीत अगरकर का कार्यकाल न बढ़ने पर इन्हें अंतरिम अध्यक्ष बनाए रखा जा सकता है।
Ramesh Powar Senior Selector: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के मुख्य चयनकर्ता के रूप में अजीत अगरकर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से नए उत्तराधिकारी की तलाश तेजी से चल रही है। लेकिन पश्चिम क्षेत्र के चयनकर्ता पद के लिए आवेदन की समय-सीमा अब खत्म हो चुकी है।
इस रेस में पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल का नाम काफी आगे चल रहा था, लेकिन उन्होंने इस पद के लिए आवेदन नहीं किया। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, रमेश पोवार जो पहले जूनियर पुरुष चयन समिति का अध्यक्ष बनने की दौड़ में थे, अब वरिष्ठ चयनकर्ता पद के मजबूत दावेदार के रूप में उभर सकते हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्थिव पटेल द्वारा आवेदन न करने के पीछे भारतीय क्रिकेट में वीवीएस लक्ष्मण का बढ़ता प्रभाव एक बड़ी वजह माना जा रहा है। हाल ही में BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया था कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) के प्रमुख होने के नाते लक्ष्मण चयन समिति की सभी बैठकों में हिस्सा लेंगे।
पार्थिव के इस रेस से बाहर होने के बाद कई मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि प्रज्ञान ओझा फिलहाल चयन समिति के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका जारी रख सकते हैं।
चयन समिति को मजबूत करने के लिए BCCI ने अपने बजट में भी भारी बढ़ोतरी की है। आरपी सिंह और प्रज्ञान ओझा के समिति में शामिल होने के बाद बजट को 3 करोड़ रुपये बढ़ाकर 17.45 करोड़ रुपये किया गया था, जिसे अब साल 2026-27 के लिए और बढ़ाकर 19.35 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, BCCI ने लगभग 100 टेस्ट मैच खेल चुके दो पूर्व दिग्गज भारतीय क्रिकेटरों से भी चयनकर्ता बनने के लिए संपर्क किया था, लेकिन दोनों ने ही इस बड़े प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
BCCI की मूल योजना यह थी कि अजीत अगरकर साल 2027 के वनडे विश्व कप तक मुख्य चयनकर्ता के पद पर बने रहें ताकि टीम के चयन और रणनीतियों में निरंतरता बनी रहे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका।
सूत्रों का मानना है कि नया अध्यक्ष आने से टीम की मौजूदा योजनाओं में बदलाव आ सकता है। चूंकि लक्ष्मण की भूमिका लगातार बढ़ रही है, इसलिए बोर्ड नए बदलावों के बजाय मौजूदा अंतरिम व्यवस्था को ही आगे बढ़ाने पर विचार कर सकता है।