पार्थ रेखड़े (फोटो-सोशल मीडिया) 
क्रिकेट

EXCLUSIVE: कैसे ‘शैतान बच्चा’ बन गया विदर्भ का स्टार ऑलराउंडर, ओडिशा के खिलाफ खोल दिया पंजा

Exclusive with Parth Rekhade: पार्थ रेखड़े ने नागपुर में ओडिशा के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में 8 विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया। कैसे पर्थ ने क्रिकेट में कदम रखा जानें इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में...

उज्जवल सिन्हा

जयदीप रघुवंशी: घर में शैतानी और नटखट रवैये से तंग आकर जब माता-पिता ने मुझे समर कैंप में डाला तो क्रिकेट मुझे भा गया। इसके बाद क्रिकेट ही मेरा पैशन बन गया और अब मैं ऑलराउंडर की भूमिका में टीम सेचुएशन में अपनी भूमिका निभाता हूं। यह कहना है फर्स्ट क्लास पदार्पण के बाद अपने करियर का पहला पंजा खोलकर मैच में 8 विकेट लेकर बेस्ट प्रदर्शन करने वाले पार्थ रेखड़े का।

पार्थ ने मंगलवार को नागपुर में खेले गए ओडिशा के खिलाफ रणजी मुकाबले में अपनी स्लो लेफ्ट आर्म्स आथ्रोडक्स बॉलिंग से मैच का रुख बदल दिया। मैच के बाद ‘नवभारत’ के जयदीप रघुवंशी से विशेष चर्चा में 26 वर्षीय पार्थ ने क्रिकेट में कदम रखने और फिर अच्छा प्रदर्शन कर लगातार आगे बढ़ने को लेकर अपनी यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि वे जब चौथी-5वीं में थे तब घर में बहुत शैतानी करते थे। तब मां ने पापा को सुझाव दिया कि इसे समर कैंप में डाल दें तो कुछ दिन घर में राहत रहेगी।

लेफ्ट आर्म स्पिनर बनने की ऐसे हुई शुरुआत

जब मैं वहां पहुंचा और क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। यह मुझे इतना पसंद आया कि मैं इसके बिना नहीं रह सका। जब मैं डॉ. आंबेडकर कॉलेज की स्पोर्ट्स एकेडमी में था तब मुझे बांबल सर और कांतूर सर जो मेरे पहले कोच थे, उन्होंने मेरे एक्शन को देखकर मुझे लेफ्ट आर्म्स स्पिनर बनने की सलाह दी। तब से मैं बैटिंग के साथ स्पिन भी सीख गया। अंडर-13 से वीसीए की टीमों को रिप्रजेंट करने लगा।

इसके बाद से बेहतर प्रदर्शन कर उम्र के अनुसार आगे बढ़ता गया। जब मैं एज ग्रुप में आया तो नागपुर क्रिकेट एकेडमी से माधव बाकरे सर का मार्गदर्शन मिला जिसके बाद मेरे प्रदर्शन में बहुत सुधार आया और आज मैं जो भी अचीव कर सका हूं, इसके पीछे उनका मार्गदर्शन है।  मेरे पिता राजेश रेखड़े अस्पताल में एडमिन ऑफिसर और मम्मी टीचर हैं।

पिछले सत्र में बटोरी थीं सुर्खियां

पार्थ ने फर्स्ट क्लास करियर में 9 माह पूर्व 30 जनवरी 2025 को हैदराबाद के सामने विदर्भ के लिए रणजी में डेब्यू किया। 17 फरवरी से खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में एक ओवर में 3 विकेट लेकर पार्थ ने मुंबई की ‘कमर’ तोड़ दी थी। तब उन्होंने पहली पारी के 41वें मेडन ओवर में अंजिक्य रहाणे, सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे जैसे दिग्गज खिलाड़ियों का विकेट चटकाकर मैच का रुख बदल दिया। इस दौरान पार्थ ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी थीं। फर्स्ट क्लास बॉलिंग करियर

  • 08 मैच
  • 14 इनिंग
  • 33 विकेट
  • 5/80 बेस्ट बॉल इनिंग (11 नवंबर)
  • 8/111 बेस्ट बॉल इनिंग (11 नवंबर)
  • 21.66 एवरेज
  • 2.45 इकोनॉमी

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