पंकज राय (फोटो-सोशल मीडिया)  
क्रिकेट

पुण्यतिथि विशेष: भारतीय क्रिकेट का वो योद्धा, जिसने सलामी बल्लेबाजी मे रचा इतिहास; सिर्फ एक मैच में बना कप्तान

Pankaj Roy: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सलामी बल्लेबाज पंकज रॉय ने धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी से पहचान बनाई। टेस्ट क्रिकेट में रिकॉर्ड साझेदारियां, यादगार पारियां और पद्मश्री सम्मान उनकी विरासत का हिस्सा रहे।

उज्जवल सिन्हा

Pankaj Roy Death Anniversary: पंकज रॉय का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन सलामी बल्लेबाजों में शुमार है, जिन्होंने तकनीकी रूप से मजबूत और धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी से अपनी अलग पहचान बनाई। टेस्ट क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं और आने वाली पीढ़ियों के बल्लेबाजों के लिए मिसाल बने।

31 मई 1928 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में जन्मे पंकज रॉय ने 1946-47 में अपने फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत की और डेब्यू मैच में ही शतक जड़कर चयनकर्ताओं का ध्यान खींच लिया। इसी शानदार शुरुआत का नतीजा रहा कि नवंबर 1951 में उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली।

इंग्लैंड के खिलाफ जड़ा था शतक

इंग्लैंड के खिलाफ 1951-52 की टेस्ट सीरीज में पंकज रॉय ने अपनी दूसरी ही टेस्ट पारी में शतक लगाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को स्थापित कर लिया। दिसंबर 1951 में ब्रैबोर्न स्टेडियम में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 20 चौकों की मदद से 140 रन की शानदार पारी खेली। इसके बाद फरवरी 1952 में चेन्नई टेस्ट में भी उन्होंने 111 रन बनाए। हालांकि, इस स्वर्णिम दौर के बाद उन्हें फॉर्म से जूझना पड़ा और एक समय ऐसा भी आया जब वह लगातार चार टेस्ट पारियों में खाता तक नहीं खोल सके।

वीन मांकड के साथ की थी 413 रनों की साझेदारी

पंकज रॉय के करियर का सबसे ऐतिहासिक पल 1954-55 में न्यूजीलैंड दौरे पर आया, जब उन्होंने वीनू मांकड़ के साथ 413 रनों की रिकॉर्ड ओपनिंग साझेदारी की। यह साझेदारी लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी ओपनिंग पार्टनरशिप रही, जिसे बाद में साउथ अफ्रीका के ग्रीम स्मिथ और नील मैकेंजी ने 415 रन बनाकर तोड़ा। घरेलू क्रिकेट में भी उनका दबदबा रहा और रणजी ट्रॉफी में बंगाल की ओर से खेलते हुए उन्होंने हैदराबाद के खिलाफ एक ही मैच में दो शतक जड़े।

एक मैच में पंकज रॉय ने की थी कप्तानी

साल 1959 में इंग्लैंड दौरे के दौरान पंकज रॉय को एक टेस्ट मैच में भारतीय टीम की कप्तानी करने का भी मौका मिला। अपने टेस्ट करियर में उन्होंने 43 मैचों की 79 पारियों में 32.56 की औसत से 2,442 रन बनाए, जिसमें 5 शतक और 9 अर्धशतक शामिल रहे। वहीं, फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 185 मैचों में 11,868 रन बनाए, जिसमें 33 शतक और 50 अर्धशतक दर्ज हैं। हालांकि, उनके करियर में उतार-चढ़ाव भी रहे और वह 14 टेस्ट पारियों में शून्य पर आउट हुए।

भारतीय क्रिकेट में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया। इसके अलावा, 2016 में उन्हें मरणोपरांत सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया गया। क्रिकेट की विरासत उनके परिवार में भी आगे बढ़ी, जब उनके बेटे प्रणब रॉय ने भारत के लिए दो टेस्ट मैच खेले।

4 फरवरी 2001 को 72 वर्ष की उम्र में पंकज रॉय का निधन हो गया, लेकिन भारतीय क्रिकेट को दी गई उनकी सेवाएं और उनकी बल्लेबाजी की विरासत आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में जीवित हैं।

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