Manoj Agarwal Chief Secretary Of West Bengal Controversy: पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को शुभेंदु अधिकारी की सरकार में मुख्य सचिव बनाए जाने से अनेक प्रश्न उठे हैं। अग्रवाल राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह हैं जो इस वर्ष जुलाई में रिटायर होने वाले थे। क्या सरकार उनकी सेवानिवृत्ति टालकर उन्हें पद पर कायम रखेगी ? उनकी देखरेख में राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया गया जिसमें 91 लाख नाम हटाए गए। इनमें से 27 लाख नाम विवादास्पद माने गए जिनकी अपील प्रक्रिया अधूरी पड़ी है।
पश्चिम बंगाल के एसआईआर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इन सारी स्थितियों को देखते हुए अग्रवाल की चीफ सेक्रेटरी पद पर नियुक्ति को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या चुनाव में बीजेपी की राह आसान बनाने के लिए उन्हें इस तरह पुरस्कृत किया गया? वह सक्षम अधिकारी होंगे लेकिन क्या उन्हें निष्पक्ष और विश्वसनीय माना जाएगा?
आम तौर पर ऐसे सीईओ या मुख्य कार्यपालक अधिकारी को चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है जो निर्वाचन कराने के कुछ समय बाद रिटायर हो जाए लेकिन मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव बनाना जनमानस में संदेह पैदा करता है कि क्या बीजेपी ने अपनी चुनावी सफलता में मदद के लिए उन्हें इनाम से नवाजा है? यहां संस्थागत विश्वसनीयता का मुद्दा उठता है। एसआईआर की प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ियां होंगी तो वह राज्य सरकार के हित में मुख्य सचिव के रूप में स्थिति संभाल लेंगे। टीएमसी ने अपने 15 वर्ष के शासन में नौकरशाही का राजनीतिकरण कर दिया था। बीजेपी सरकार को इससे बचना चाहिए।
नई सरकार ने आश्वासन दिया है कि जिनके मताधिकार संबंधी मामले अभी भी न्यायाधिकरण के सम्मुख विचाराधीन हैं, उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ मिलते रहेंगे लेकिन जिनके नाम एसआईआर के दौरान हटा दिए गए हैं, उन्हें ऐसा कोई लाभ नहीं मिलेगा। चुनाव के ठीक पहले एसआईआर कराने से मतदाताओं की अपील पर सुनवाई नहीं हो पाई। स्वयं को सबूतों के साथ वोटर सिद्ध करने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डाल दी गई थी।
नई सरकार के एक मंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने सीएए के अंतर्गत नागरिकता के लिए आवेदन किया है, उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। सीएए में पड़ोसी देशों से आए गैरमुस्लिमों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। एसआईआर में मुस्लिमों के नाम बड़ी तादाद में हटाए जाने का आरोप है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह राज्य से घुसपैठियों को खदेड़ने की असम की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार का अनुकरण करेंगे। इस तरह की प्रशासकीय प्रक्रिया में चीफ सेक्रेटरी के निर्देश का विशेष महत्व रहेगा।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा