Trump Iran War AI Video: ईरान से चल रहे युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप इतने कुंठित हो गए हैं कि उन्होंने जंग का एक नया मैदान खोज निकाला है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का दायरा, जिसमें वह की-बोर्ड की मदद से ईरान के तेल टर्मिनल नष्ट कर रहे हैं। 30 अगस्त की रात को उन्होंने एआई की मदद से बनाया गया वीडियो पोस्ट किया, जिसमें ईरान के स्ट्रेटेजिक खर्ग द्वीप को नष्ट होते हुए दिखाया गया है और ट्रंप कह रहे हैं कि महत्वपूर्ण तेल हब को 'चकनाचूर कर दिया गया है'।
वीडियो में विस्फोट व बर्बादी दिखाई गई, जिसके बारे में रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। पेंटागन ने खर्ग द्वीप पर किसी भी हमले की पुष्टि नहीं की है। ट्रंप के मुताबिक 'ईरान तो मर चुका है। दूसरी ओर रूस व यूक्रेन की जंग भी बंद होने का नाम नहीं ले रही है। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन व ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से अलग-अलग द्विपक्षी मुलाकातें करते हुए अपने शांति की संदेश को पुनः दोहराया और कहा कि अब अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत करने का समय आ गया है।
मोदी अन्य विश्व नेताओं के साथ किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हैं। मोदी व पुतिन की वार्ता से ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों नेता दिल्ली व मास्को के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के पक्ष में हैं। इससे क्या नई दिल्ली व वॉशिंगटन के संबंध प्रभावित होंगे? अमेरिकी सीनेट ने 7 अगस्त को एक विधेयक 86-11 के प्रभावी अंतर से पारित किया, जिसका नाम बदलकर अब लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट कर दिया गया है और जिसके तहत भारत व चीन आदि देशों पर अमेरिका 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है, क्योंकि ये रूस के पेट्रोलियम उत्पाद के मुख्य खरीदार हैं।
अमेरिका का तर्क है कि इस खरीदारी के चलते ही रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखे हुए है। इस विधेयक के पारित होने से ट्रंप को यह छूट मिल जाती है कि वह उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएं, जो रूसी तेल व गैस आयात करते हैं।
वर्तमान में रूसी तेल व गैस को आयात करने वाले टॉप 5 देश हैं, चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया। रूस पर पाबंदियों के अतिरिक्त इस विधेयक की अवधि का विस्तार 2031 तक रहेगा, जो कि ईरान पर पाबंदी कानून, 1996 की एक्सपायरी डेट है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिका भारत के विरुद्ध टैरिफ में अतिरिक्त वृद्धि करने जा रहा है, जिसका दिल्ली व वॉशिंगटन के बीच जो व्यापार समझौता संभावित है उस पर भी गहरा असर पड़ सकता है।
पेजेशकियन के साथ मुलाकात में मोदी ने नौपरिवहन व वाणिज्य में आजादी पर बल देते हुए कहा कि किसी भी सूरत में नागरिकों व नागरिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया का टकराव वातचीत व डिप्लोमेसी से हल किया जाना चाहिए, मोदी का यह कहना एकदम सही है कि 'युद्ध में गुजारा गया प्रत्येक दिन मानवता को पीछे धकेल देता है और शांति की ओर बढ़ाया गया हर कदम मानवता को नई उम्मीद व उत्साह से भर देता है'।
लेकिन शांति के इन उपदेशों से किसी के कान पर जूं नहीं रेंग रही है। 2024 में अपनी मास्को और फिर कीव यात्राओं के दौरान भी मोदी ने कहा था कि 'जंग के मैदान पर कोई समाधान नहीं निकलता है। यह बात भी सही थी कि हल के लिए आखिरकार वार्ता की मेज पर ही आना पड़ता है। लेकिन जंग तो अभी तक जारी है। रूस व ईरान से व्यापार में विस्तार व विविधता लाने से वह ट्रंप को स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि वॉशिंगटन के साथ जो लंबित व्यापार समझौता है, उसे दिल्ली की शर्तों पर स्वीकार किया जाए वर्ना भारत के पास अन्य विकल्प भी खुले हुए हैं।
ट्रंप को भी दे दिया संकेत
जंग के मैदान पर कोई समाधान नहीं निकलता है'। यह बात भी सही थी कि हल के लिए आखिरकार वार्ता की मेज पर ही आना पड़ता है। लेकिन जंग तो अभी तक जारी है। रूस व ईरान से व्यापार में विस्तार व विविधता लाने से वह डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि वॉशिंगटन के साथ जो लंबित व्यापार समझौता है, उसे दिल्ली की शर्तों पर स्वीकार किया जाए वर्ना भारत के पास अन्य विकल्प भी खुले हुए हैं।
लेख- विजय कपूर के द्वारा