

Traffic Jams In India: नई कार खरीदने के बाद हर किसी का सपना होता है कि वह आराम से अपनी गाड़ी में बैठकर ऑफिस पहुंचे और ट्रैफिक में घंटों फंसने से छुटकारा मिले सकें। लेकिन भारत के बड़े शहरों की सड़कों पर उतरते ही यह सपना अक्सर टूट जाता है। वहीं गड्ढों, संकरी सड़कों और बढ़ते ट्रैफिक के बीच लाखों रुपये की कार भी कई बार साइकिल जैसी रफ्तार से चलने को मजबूर हो जाती है। इसको लेकर एक ट्रैफिक रिपोर्ट ने देश के महानगरों और टियर-2 शहरों में पीक आवर की स्थिति की चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है।
रिपोर्ट के आंकड़ों को देखे तो पता चलता है कि दिल्ली में सामान्य समय के दौरान गाड़ियों की औसत रफ्तार करीब 46 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है। लेकिन सुबह-शाम ऑफिस जाने और लौटने के समय यही स्पीड घटकर सिर्फ 19 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है। वहीं मुंबई और हैदराबाद में भी स्थिति बहुत अलग नहीं है। दोनों शहरों में सामान्य समय की करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पीक आवर में घटकर लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है। वहीं बेंगलुरु में ट्रैफिक के दौरान गाड़ियों की औसत स्पीड महज 13 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है।
इन महानगरों में कोलकाता की स्थिति सबसे ज्यादा परेशान करने वाली नजर आ रही है। जिसमें यहां सामान्य समय में वाहनों की रफ्तार करीब 29 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है लेकिन पीक आवर में यह घटकर सिर्फ 11 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है। जिसका सीधा मतलब है कि छोटी दूरी के सफर में कई बार पैदल चलना या साइकिल चलाना कार से ज्यादा तेज विकल्प साबित हो सकता है। यह स्थिति सिर्फ समय की बर्बादी नहीं करती बल्कि ईंधन की खपत और ड्राइविंग तनाव भी बढ़ाती है।
देखा जा रहा है कि ट्रैफिक की परेशानी अब केवल दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। वहीं जयपुर में सामान्य समय की 38 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पीक आवर में 14 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है। इसके साथ ही लखनऊ में यह 36 से घटकर 15 और इंदौर में 31 से घटकर 12 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है।
रिपोर्ट में सामने आया है कि शहरों में संकरी सड़कों का नेटवर्क भी जाम की बड़ी वजह है। वहीं हैदराबाद की 95%, कोलकाता की 94% और दिल्ली-चेन्नई की करीब 92% सड़कें 10 मीटर से कम चौड़ी हैं। मुख्य सड़क पर जाम लगने के बाद लोग शॉर्टकट के लिए इन गलियों में पहुंचते हैं लेकिन बड़ी गाड़ियों की आवाजाही वहां भी ट्रैफिक रोक देती है। ऐसे में सिर्फ नई सड़कें बनाना पर्याप्त नहीं होगा। मौजूदा सड़कों की मरम्मत, गड्ढों का समाधान, बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट और सड़क चौड़ीकरण पर एक साथ काम करना जरूरी है। वरना बढ़ती कारों के साथ शहरों की रफ्तार और धीमी होती जाएगी।