Sachin Pilot 49th Birthday Special: भारतीय राजनीति में ऐसे कई नेता हुए, जो अपनी लव स्टोरी को लेकर हमेशा ही सुर्खियों में रहे। कई बार उनका निजी जीवन सियासत में नई समीकरण और चुनौतियां पैदा कर देता है, तो कई बार यह नई गठजोड़ का रास्ता खोल देता है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट और सारा अब्दुल्ला की लव स्टोरी भी कुछ ऐसी ही रही है।
जहां, मुस्लिम लड़की होने के कारण उन दोनों की शादी में काफी अड़चनें आई। लेकिन, आखिरकार में प्यार के आगे सियासत को हारना ही पड़ा और जम्म-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अबदुल्ला की बेटी सारा अब्दुल्ला के साथ सचिन पायलट की शादी हुई। दो अलग-अलग धर्मों के बीच यह शादी कितनी मुश्किल थी और कैसे अपने अंतिम पड़ाव तक पहुंचा? आइए सबकुछ विस्तार से जानते हैं।
सचिन पायलट आज अपना 49वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 7 सितंबर, 1977 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ था। मूलरूप से वे वेदपुरा ग्रेटर नोएडा के रहने वाले हैं। पिता राजेश्वर प्रसाद बिधूड़ी एयरफोर्स में पायलट थे। गांधी परिवार के काफी नजदीकी होने के कारण संजय गांधी के कहने पर राजेश्वर प्रसाद बिधूड़ी ने अपना नाम बदलकर राजेश पायलट रखा और भरतपुर से लोकसभा चुनाव लड़कर सासंद बने। उनकी मां रमा पायलट भी सासंद रहीं। सचिन को पायलट सरनेम उनके पिता से मिला था।
सचिन पायलट की शुरुआती शिक्षा दिल्ली के एयरफोर्स बाल भारती स्कूल से हुई थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। बाद में वे अमेरिका के पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल चले गए थे। जहां से उन्होंने MBA की डिग्री पूरी की। सचिन पायलट की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी। जब वे 22 साल के थे तभी उनके पिता की एक हादसे में मौत हो गई। साल 2024 में महज 26 साल की उम्र चुनाव जीतकर वह लोकसभा पहुंचे।
सचिन पायलट जब अमेरिका की प्रतिष्ठित पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के व्हार्टन स्कूल से MBA की पढ़ाई कर रहे थे, ठीक उसी दौर में सारा अब्दुल्लाह लंदन में उच्च शिक्षा हासिल कर रही थीं। दरअसल, 1990 तक सारा अपने परिवार के साथ कश्मीर में ही रहती थीं। हालांकि, उस समय घाटी में बने तनावपूर्ण माहौल के चलते जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अपनी बेटी सारा और पत्नी को सुरक्षा के लिहाज से लंदन भेज दिया था।
दोनों का ताल्लुक देश के दो बड़े और रसूखदार राजनीतिक घरानों से था, इसलिए वे एक-दूसरे के नाम से पहले से वाकिफ थे। मगर उनकी पहली औपचारिक मुलाकात लंदन की एक पार्टी में हुई। यहीं से दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, जो पहले गहरी दोस्ती में बदला और फिर धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में तब्दील हो गया।
सचिन पायलट अपनी पढ़ाई पूरी कर भारत लौट आए, जबकि सारा इंग्लैंड में ही बनी रहीं। इस लंबी दूरी ने उनके अहसास को और गहरा कर दिया और उन्हें समझ आ गया कि वे एक-दूसरे के लिए बने हैं। लगभग तीन सालों तक दोनों का यह रिश्ता सिर्फ ईमेल्स और फोन कॉल्स के भरोसे चलता रहा, लेकिन दूरियों के बावजूद उनके प्यार में कोई कमी नहीं आई।
सचिन पायलट ने हिम्मत जुटाकर अपने परिवार को समझाना शुरू किया और आखिरकार अपनी जिद से उन्हें इस रिश्ते के लिए राजी कर लिया। दूसरी ओर, राह इतनी आसान नहीं थी। जब सारा ने अपने पिता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के सामने सचिन से शादी की इच्छा रखी, तो उन्होंने इस रिश्ते को सिरे से खारिज कर दिया।
सारा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि हमारे देश में धर्म और जाति को लेकर लोग तुरंत आक्रामक हो जाते हैं। मैं मुस्लिम थी और सचिन हिंदू, इसलिए शुरुआत में दोनों परिवारों ने साफ मना कर दिया था। आखिरकार सचिन ने तो अपने घर पर सभी को राजी कर लिया, लेकिन मैं अपने परिवार को मना नहीं सकी।
सारा के मुताबिक दोनों परिवारों के बीच पहले से अच्छे संबंध थे। सचिन को उनकी मां काफी पसंद करती थीं और वे अक्सर घर मिलने भी आया करते थे। सारा ने कहा कि हम चीजों को बिल्कुल सही और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ा रहे थे, क्योंकि मुझे यकीन था कि सचिन ही मेरे लिए सही जीवनसाथी हैं।
2004 में सचिन और सारा की हुई थी शादी
आखिरकार 15 जनवरी 2004 को सचिन पायलट और सारा अब्दुल्लाह विवाह बंधन में बंध गए। उन्होंने दिल्ली के 20 कैनिंग लेन स्थित आवास पर एक सादे और निजी समारोह में सात फेरे लिए। इस शादी में केवल पायलट परिवार, कुछ बेहद करीबी दोस्त और चुनिंदा रिश्तेदार ही शामिल हुए।
दूसरी ओर, सारा के परिवार से इस शादी में कोई शामिल नहीं हुआ। उस समय उनके पिता फारूक अब्दुल्ला लंदन में थे, जबकि भाई उमर अब्दुल्ला अस्वस्थ होने के कारण अस्पताल में भर्ती थे और उन्होंने इस शादी से दूरी बनाए रखी।
शादी के 19 साल बाद इस रिश्ते के अंत की खबर ने सभी को चौंका दिया। 31 अक्टूबर को जब सचिन पायलट टोंक विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल करने पहुंचे, तो उनके हलफनामे से दोनों के तलाक का आधिकारिक खुलासा हुआ। इससे पहले तक उनके अलगाव या तलाक की कभी कोई सार्वजनिक चर्चा नहीं हुई थी।
हालांकि, दोनों का तलाक कब और कहां हुआ, इसे लेकर अब भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों ने आपसी सहमति और समझबूझ के साथ ही एक-दूसरे से अलग होने का फैसला किया।