Rahul Gandhi Modi Government: पड़ोसी ने हमसे कहा, "निशानेबाज, कांग्रेस नेता राहुल गांधी का आक्रामक अंदाज देखते ही चनता है। 2029 के लोकसभा चुनाव तक भी वह धैर्य रखना नहीं चाहते बल्कि दावा कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का समय फिनिश्ड हो चुका है। बीजेपी और संघ उनके उत्तराधिकारी की तलाश में जुट गए हैं।'
हमने कहा, 'इस तरह की बातें कल्पना की उड़ान के सिवा कुछ भी नहीं हैं। मोदी सरकार के पास एनडीए की कंफटेंबल मेजारिटी है। बीजेपी को चंद्राबाबू नायडू की टीडीपी और नीतीशकुमार की जदयू का समर्थन तो है ही, साथ में शिंदे के बंदे भी उनके साथ हैं। राकांपा (अजीत) का भी सहयोग है। ममता को टीडीपी से फूट चुके सांसद भी उनकी जेब में हैं। राहुल हवा में तलवार भांज रहे हैं।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हर किसी को सपने देखने का हक है। मोदी इतने कल्पनाशील हैं कि अभी से 2047 का ड्रीम देखने लगे हैं। राहुल का सपना यह है कि राजनीतिक रेस की फिनिश लाइन के पहले ही मोदी का दम फूल गया और कदम लड़खड़ा गए हैं। उनका टाइम पूरा हो गया है। आपको राहुल की बेकरारी समझानी चाहिए,
हमने कहा, 'यह बेकरारी नहीं बल्कि छटपटाहट है। साफ दिखाई दे रहा है कि जैसे बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है, वैसे ही मोदी-शाह की भाजपा ने विपक्ष में रह चुकी छोटी पार्टियों को पचाना शुरू कर दिया है। ऐसे में मोदी कहां से फिनिश हो गए? अभी तो राजनीति के महासागर में बीजेपी ही सबसे बड़ी फिश है। वह व्हेल है या किलर शार्क, यह तो राहुल ही बताएंगे।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, राहुल गांधी का नौजवानों पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि 1980, 1984, 2004 और 2009 में देश के युवाओं ने कांग्रेस को समर्थन दिया था। अभी उन्हें जैन-जी के सहयोग की उम्मीद है। शिवसेना (उद्धव) के सांसद संजय राऊत ने सनसनीखेज दावा किया है कि मोदी के 77 वें जन्मदिवस 17 सितंबर के बाद देश में राजनीतिक भूकंप आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के बाद अमित शाह पीएम नहीं बनेंगे।'
हमने कहा, 'ऐसी हवाबाजी या अटकलबाजी में उलझने की जरूरत नहीं। सब अपना-अपना माहौल बनाने में लगे हैं। एक शेर है- इब्तदाए इश्क है, रोता है क्या, आगे-आगे देखिए होता है क्या!'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा