Rahul Gandhi Opposition Politics: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हम मोहब्बत की दुकान की फ्रेंचाइसी लेना चाहते हैं। क्या इसके लिए राहुल गांधी से संपर्क करें?' हमने कहा, 'राहुल के रवैये में मोहब्बत कहां रही? वह बड़े ही तीखे स्वर में सरकार की आलोचना करते हैं। प्यार मोहब्बत के लिए जुबान में शहद जैसी मिठास लानी पड़ती है। लोकतंत्र आम सहमति से चलता है, निरंतर गतिरोध और टकराव से नहीं।
राहुल गांधी को मोहब्बत का मर्म समझने के लिए हीर रांझा, सोहनी महिवाल, लैला मजनू, सलीम-अनारकली के किस्से पढ़ने चाहिए। चाहे जैसी भी हो सरकार, विपक्षी करे उससे प्यार! मोदी भी विदेशी नेताओं को देखते ही कसकर छाती से चिपकाते हैं। वे यहां भी विपक्षी नेताओं को निस्संकोच गले लगाएं। उनसे कहें कि मुस्कुराओ तो कोई बात बने, पास आओ तो कोई बात बने !'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन मोदी और शाह ने सदन में दर्शन दिए। इसके पहले विपक्ष बार-बार उनका नाम स्मरण करता रहा। विपक्ष का हमला रोकने में बिड़ला लगे रहे। रिजिजू ने राजी करने की कोशिश की। नड्डा ने भी गड्डा भरने का प्रयास किया लेकिन विपक्ष का हठीला और कटीला रुख बना रहा है। वह टस से मस नहीं हुआ। वह प्यादों से नहीं, वजीर से निपटना चाहता था।'
हमने कहा, 'मानसून सत्र बीत गया। इसलिए बीती ताही बिसार दे आगे की सुधि ले। नवंबर-दिसंबर में शीत सत्र होगा। तब तक राजनीतिक मौसम बदल सकता है। कहीं न कहीं दोनों पक्षों को कम्प्रोमाइज करना ही होगा। हम तो यही सलाह देंगे कि धूप में निकलो, रोशनी में नहाकर देखो, जिंदगी क्या है, जरा चश्मा हटाकर देखो !'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, आप किसके चश्मे की बात कर रहे हैं? मोदी का चश्मा या अमित शाह का चश्मा ? हमारा ख्याल है कि कुछ ऐसे अनौपचारिक आयोजन होने चाहिए जिनमें पक्ष-विपक्ष के नेताओं की मुलाकात हो।
शरद पवार की नातिन की शादी में मोदी ने प्रियंका गांधी से पूछा था प्रियंकाजी कैसी हैं। ऐसे संवाद होते रहें तो कटुता की बर्फ पिघलेगी। यह समझना होगा कि दुश्मनी जमकर करो लेकिन यह गुंजाइश रहे, फिर कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिदा न हों!'