Modi Power Chair Politics: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, प्रधानमंत्री मोदी 12 वर्षों से सत्ता संभाल रहे हैं। देश के अधिकांश राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं फिर भी मोदी कहते हैं कि हमारा लक्ष्य विकसित भारत है, कुर्सी नहीं! इससे क्या समझा जाए?'
हमने कहा, 'समझदार को इशारा काफी होता है। विकसित भारत का लक्ष्य 2047 रखा गया है अर्थात आजादी की 100 वीं वर्षगांठ, इसलिए तब तक बीजेपी को देश की जिम्मेदारी संभालनी है। इसके लिए कुर्सी तो हर हाल में चाहिए। यह बात अलग है कि मोदी और शाह को अपने लिए मजबूत कुर्सी रखनी है। कुर्सी से मोह न रखने का उपदेश उन्होंने अपनी सरकार के 3 दर्जन राज्यमंत्रियों के साथ ही 5 स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों को दिया है। इसका मतलब है कि राजनीति के म्यूजिकल चेयर वाले गेम में उन मंत्रियों की कुर्सी कभी भी खिसकाई जा सकती है।
अपनी पार्टी के किसी भी मंत्री, सांसद या मुख्यमंत्री को अर्श से फर्श पर लाने का उनका मिजाज बना रहता है। उमा भारती, स्मृती ईरानी, वीके सिंह, प्रकाश जावड़ेकर की केंद्र से कुर्सी गई कि नहीं। रमन सिंह, शिवराजसिंह चौहान कभी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हुआ करते थे। बीजेपी में त्याग और तपस्या का महत्व है इसलिए समझाया जाता है कि कुर्सी आज है तो कल नहीं है!'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, जहां तक कुर्सी की बात है, बीजेपी के पास हर तरह की कुर्सियों का स्टॉक है। पुराने नेता आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी मार्गदर्शक मंडल की आराम कुर्सियों या इजी चेयर पर लिटा दिए गए हैं। कुछ बूढ़े नेताओं को राजभवन की शोभायमान कुर्सी देकर राज्यपाल बना दिया जाता है।'
हमने कहा, 'आपको याद होगा कि चौधरी चरणसिंह और चंद्रशेखर प्रधानमंत्री पद की लड़खड़ाती कुर्सी पर बैठे थे। जब कांग्रेस ने समर्थन का पाया खींच लिया, तो ये नेता धड़ाम से गिर पड़े। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से केंद्र में बीजेपी की कुर्सी को नीतीशकुमार और चंद्राबाबू का सहारा मिल गया। कुछ नेता गोल घूमने वाली रिवॉल्विंग चेयर पर बैठकर अपने खोखले आश्वासनों से जनता को गोल-गोल घुमाते हैं।
कुर्सी उस पर बैठे नेता को संदेश देती है कि पब्लिक को पटाने वाले लोकलुभावन फैसले लेकर लुटा दे सरकारी खजाना, नहीं तो कुर्सी खोकर पड़ेगा पछताना! कुछ ऐसे भी बाहरी नेता हैं जो अपनी फोल्डिंग चेयर लेकर पार्टी में घुस जाते हैं और जब तक मंत्री पद की कुर्सी नहीं मिलती, उसका ख्वाब देखते रहते हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा