Parliament Session Deadlock News: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हमने कहावत सुनी थी 'नंगे से खुदा डरे' लेकिन सफेद टी शर्ट और कार्गो पैंट पहनने वाले विपक्ष के नेता राहुल गांधी से गृहमंत्री अमित शाह क्यों इतना डरे हुए हैं कि संसद भवन के अपने चेंबर में चुपचाप बैठ जाते हैं, लेकिन सदन में आने की हिम्मत नहीं जुटा पाते ?'
हमने कहा, 'शाह की शर्त है कि वह सदन में आने को तैयार हैं लेकिन विपक्ष को कोई रुकावट न डालते हुए शांति और धैर्य से उनका इकतरफा बयान सुनना चाहिए। वह बयान देकर चुपचाप खिसकना चाहते हैं। विपक्ष की नारेबाजी, व्यवधान और तीखे सवालों से वह बचना चाहते हैं। उनकी इतनी-सी शर्त विपक्ष मान क्यों नहीं लेता?'
पड़ोसी ने कहा, 'विपक्ष का कहना है कि हमें शाह का लंबा बयान और इधर-उधर की ध्यान भटकाने वाली गोलमोल बातें नहीं सुननी हैं। वह सिर्फ इस सवाल का जवाब दें कि छात्रों पर गोली किसने चलवाई? कील लगी लाठियों से छात्रों को पीटने का आदेश किसने दिया ? इसके अलावा विपक्ष अमित शाह का सम्मान न रखते हुए उन्हें भगोड़ा और तड़ीपार कहता है। इसमें तथ्य क्या है?'
हमने कहा, 'जब 21 दिनों से अमित शाह सदन से गायब हैं, तो विपक्ष उन्हें लापता और भगोड़ा कह रहा है। तड़ीपार इसलिए कह रहा है क्योंकि जब अमित शाह गुजरात के गृहमंत्री थे, तब सोहराबुद्दीन और कौसर बी की रहस्यमय स्थितियों में हत्या हुई थी। इस तथाकथित एनकाउंटर के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शाह को तड़ीपार किया गया था।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, इतनी पुरानी बातें निकालना गड़े मुर्दे खोदने के समान है। आज यदि मोदी-शाह का वश चले, तो राहुल गांधी को ही संसद सदस्यता से तड़ीपार करवा दें। राहुल को पप्पू और नासमझ कहने का अंजाम बीजेपी नेता भुगत रहे हैं। जो खुद बबूल का झाड़ लगाता है, वह आम के फल लगने की उम्मीद कैसे कर सकता है? सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं, सपा नेता अखिलेश यादव और 'आप' के सांसद संजय सिंह भी बड़े ही तीखे शब्दों में सरकार की परेड लेते हैं। मोदी और शाह ने खुद पीछे रहकर विपक्ष के शब्दबाण झेलने के लिए किरेन रिजिजू और जेपी नड्डा को आगे कर दिया है। संसद में स्वस्थ बहस और चर्चा की बजाय प्रतिद्वंद्विता और शत्रुता बढ़ गई है। अपने बहुमत के बावजूद NDA बेबस है।'