भारत को चाहिए दूसरा स्वतंत्रता संग्राम, सोनम वांगचुक की चेतावनी ने बढ़ाई नेताओं की धड़कनें! जनता से मांगी मदद

Sonam Wangchuk: स्वतंत्रता दिवस से पहले, सोनम वांगचुक ने भारत में राजनीतिक भ्रष्टाचार पर चिंता जताई है और नागरिकों से नेतृत्व बदलने के लिए एक शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
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सोनम वांगचुक सौजन्य-IANS
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Sonam Wangchuk Video: एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देश के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें जनता से दूसरे स्वतंत्रता संग्राम के लिए मदद मांगी है। साथ ही जनता से नेताओं को चुनने का तरीका बदलने की अपील की है।

आजादी के दिन से पहले जारी एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, और इस दौरान उन्होंने देश और उसके भविष्य के बारे में गहराई से सोचा। उन्होंने कहा कि जो देश कभी भारत के बराबर या उससे पीछे माने जाते थे, वे अब कई क्षेत्रों में भारत से आगे निकल गए हैं।

सोनम वांगचुक ने की अपील

सोनम वांगचुक ने कहा कि अगर प्रति व्यक्ति आय और विकास के मौजूदा रुझान ऐसे ही बने रहे, तो भारत 2047 तक उस स्थिति को हासिल नहीं कर पाएगा जिसकी कल्पना उसके नागरिकों ने की है।

सोनम वांगचुक ने मांगी मदद

सोनम वांगचुक ने 15 अगस्त को जनता से मदद मांगी। उन्होंने कहा, इस आजादी के दिन, मुझे आपकी मदद चाहिए। इस देश को एक शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत है, कम से कम अपने नेताओं को चुनने के तरीके में अगर हम 2047 तक एक सम्मानजनक देश बने रहना चाहते हैं।

हमारे लगभग आधे सांसदों पर आपराधिक मामले हैं और एक-तिहाई पर हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि भरोसे की कमी देश की सबसे बड़ी कमी बन गई है। मैं देश के सबसे बेहतरीन लोगों से सलाह लेना चाहता हूं, चाहे वे कहीं भी हों, ताकि इस बात पर चर्चा हो सके कि क्या बदलना चाहिए और कैसे।

यह सिर्फ राजनीतिक पार्टियों से जुड़ा मुद्दा नहीं है

सोनम वांगचुक ने कहा कि देश की समस्याओं को सिर्फ किसी एक राजनीतिक पार्टी के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पार्टियों की सरकारों के दौरान असहमति की आवाजों को दबाने के मामले सामने आए हैं।

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वांगचुक ने कहा, "एक पार्टी की सरकार के खिलाफ आवाज उठाई गई, और दूसरी पार्टी की सरकार ने भी उसे उसी तरह दबा दिया। इसलिए, यह मामला सिर्फ राजनीतिक पार्टियों तक सीमित नहीं है।" उन्होंने कहा कि यह समस्या बहुत गहरी है और इसका समाधान बड़े स्तर पर खोजने की जरूरत है।

निडर और अच्छे चरित्र वाले लोगों की जरूरत

सिर्फ सोचने वाले बुद्धिजीवी ही नहीं, बल्कि निस्वार्थ, निडर और अच्छे चरित्र वाले लोग। दूर-दराज लद्दाख में बैठे हुए मुझे नहीं पता कि वे कौन हैं और कहां हैं, इसलिए आप देश और अपने इलाके से कम से कम एक ऐसे व्यक्ति का नाम सुझाकर मदद कर सकते हैं। क्या हम मिलकर भारत का दूसरा आजादी का आंदोलन शुरू कर सकते हैं। आप इस संदेश को फैलाकर और अगर हो सके तो अपनी क्षेत्रीय भाषा में इसका अनुवाद करके भी मदद कर सकते हैं।

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