नवभारत डिजाइन फोटो 
नवभारत विशेष

Navabharat Nishanebaaz: बेबुनियाद रिश्ते दे जाते शॉक, नादान दोस्त ज्यादा खतरनाक

America Pakistan Relations: अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों, वैश्विक रणनीति और भरोसे की राजनीति पर उठे सवालों के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई बहस तेज होती दिख रही है।

अंकिता पटेल

US Pakistan Strategic Ties: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, दोस्ती हमेशा सोच-समझकर करनी चाहिए क्योंकि चालाक दुश्मन की तुलना में नादान दोस्त ज्यादा खतरनाक होता है। ऐसा दोस्त कहां ले जाकर डुबोएगा, इसका कोई ठिकाना नहीं है। अमेरिका ने पाकिस्तान पर भरोसा किया लेकिन उसने अपने नूरखान एयरबेस में ईरानी एयरफोर्स के विमानों को छुपाने में मदद की। पहले भी पाकिस्तान ने अपनी अबोटाबाद सैनिक छावनी के निकट 9/11 के आतंकी ओसामा बिन लादेन को छुपाकर रखा था जिसे अमेरिका के सील कमांडों ने एक साहसी मिशन के तहत मार गिराया था। पाकिस्तान अमेरिका को बार-बार दगा देता है लेकिन फिर भी वह अमेरिका को प्रिय है। पाकिस्तान के हर गुनाह को अमेरिका नजरअंदाज कर देता है। ट्रंप पाक सेना प्रमुख मुनीर को ग्रेट फील्ड मार्शल कहते हैं।'

हमने कहा, 'दोस्तो में कोई शर्त नहीं होतो। दुर्योधन में लाख अवगुण थे लेकिन कर्ण ने उसे अपना धनिष्ठ मित्र बनाकर अंत तक साथ दिया था। वजह यह थी कि द्रौपदी के 10 स्वयंवर में कर्ण को सूतपुत्र कहकर अपमानित किया गया था तो दुर्योधन ने तुरंत कर्ण को अंगप्रदेश का राजा घोषित कर दिया था। इसके साथ ही दोनों की दोस्ती पक्की हो गई थी।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, आपने गीत सुना होगा- मेरी दोस्ती तेरा प्यार। फिल्म 'शोले' में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र को गाते दिखाया गया था ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे। फिल्म जंजीर का गीत है- यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी। दोस्ती में अमीरी-गरीबी नहीं देखी जाती। कृष्ण-सुदामा की मित्रता प्रसिद्ध है।'

हमने कहा, 'आज के जमाने में मतलब के यार ज्यादा मिलते हैं। कहा जाता है- यार-दोस्त किसके, माल खाए खिसके! किसी भरोसे के दोस्त को पार्टनर बनाकर बिजनेस करो तो वह भी दगा दे जाता है। मतलब निकल जाने के बाद कोई किसी को पहचानता नहीं। यह मौकापरस्ती वाली फ्रेंडशिप होती है जो सीमित उद्देश्यों के लिए हुआ करती है। डोनाल्ड ट्रंप को ही देखिए। वह बार-बार कहते हैं- 'माय फ्रेंड मोदी' और फिर भी भारत पर भारी टैरिफ लगाते हैं। जब किसी मित्र से संबंध बिगड़ जाए तो कहना पड़ता है- दोस्त-दोस्त ना रहा, प्यार-प्यार ना रहा, जिंदगी हमें तेरा ऐतबार ना रहा।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

12 साल में कितना बदला भारत, स्वच्छ भारत मिशन ने बदली गांव-शहरों की तस्वीर, आंकड़ों में समझें असर

काशी विद्यापीठ का वो सफर, जिसने दिया उन्हें शास्त्री का नाम, प्रधानमंत्री होते हुए भी साइकिल से जाते थे बाजार

Lal Bahadur Shastri: सरनेम नहीं, शिक्षा की उपाधि था शास्त्री! जानें देश के दूसरे PM के नाम की दिलचस्प कहानी

जयंती विशेष: गांधी जी ने की थी चोरी, फिर पिता को लिखी चिट्ठी; पढ़कर आंखों में आ गए थे आंसू

जयंती विशेष: गांधी जी ने क्यों चुना था वर्धा का सेवाग्राम? जानें साबरमती से सेवाग्राम तक की पूरी कहानी