पाकिस्तान अफ़गानिस्तान युद्ध (डिजाइन फोटो) 
नवभारत विशेष

संपादकीय: पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बना तालिबान, 150 सैनिक ढेर, 40 चौकियों पर कब्जा

Pakistan Taliban War: पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर युद्ध जैसे हालात हैं। TTP के हमलों में 150 पाक सैनिक मारे गए, जिसके बाद अमेरिका ने अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है।

आकाश मसने

Pakistan Afghanistan War: पाकिस्तान के लिए अफगान तालिबान बड़ी चुनौती बना णा हुआ है जिसने दावा किया कि 5 दिनों में उसने पाकिस्तानी फौज के 150 सैनिकों को मौत के घाट उत्तार दिया और 40 चौकियों पर कब्जा कर लिया। वहां के हालात देखते हुए अमेरिका ने कराची और लाहौर कान्सुलेट के अपने स्टाफ को पाकिस्तान छोड़कर वापस आने का आदेश दिया है। पाकिस्तान की सीमा अफगानिस्तान के अलावा ईरान से भी लगी हुई है इसलिए खतरे का अंदेशा बना हुआ है।

एक समय वह भी था जब रूसी सेनाओं से लड़ने के लिए अफगानिस्तान के कट्टरपंथी युवाओं को पाकिस्तानी फौज और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अमेरिका के पैसों व शस्त्रों की मदद से तैयार कर उन्हें मुजाहिदीन या तालिबान का नाम दिया था। फिर ये तालिबान अमेरिका के लिए सिरदर्द बन गए थे। उनके हमलों की वजह से अमेरिकी फौजों को अफगानिस्तान से भागना पड़ा था। अफगानिस्तान उस डूरंड लाइन को नहीं मानता जिसे ब्रिटिश शासकों ने पाकिस्तान से सीमा रेखा के तौर पर निर्धारित किया था। पाकिस्तान के पश्तोभाषी खैबर पख्तुनवा जैसे क्षेत्रों पर तालिबान अपना कब्जा चाहते हैं।

तालिबान के पास अमेरिकी हथियार

तालिबान के पास अमेरिकी फौज के छोड़े हुए शत्र हैं। अफगानिस्तान की तुलना में पाकिस्तान की सेना अधिक शक्तिशाली है लेकिन तालिबान गुरिल्ला युद्ध कर ज्यादा नुकसान पहुंचाने में कुशल हैं। पाक व अफगान के बीच 2600 किलोमीटर की सीमा है जहां कितनी ही पाकिस्तानी चौकियों को तालिबान निशाना बनाते हैं। तालिबान के अलावा बलूच विद्रोही भी पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बने हुए हैं जिन्होंने एक बार पूरी यात्री ट्रेन को अगवा कर अपनी ताकत दिखाई थी। तहरीक-ए-तालिबान (TTP) को अफगानिस्तान की मदद है। यह संगठन पाकिस्तान की सरकार व सेना को खुली चुनौती देता है और उसका उद्देश्य पाकिस्तान में शरीयत की सत्ता स्थापित करना है।

10 वर्ष पूर्व टीटीपी ने पेशावर के सैनिक स्कूल पर हमला कर 125 से अधिक बच्चों की हत्या कर दी थी। उसके पास हजारों आत्मघाती हमलावर या फियादीन है। इसी तालिबान ने कुछ दशक पूर्व बामियान के पर्वतों में बनी विशाल बुद्ध प्रतिमाओं को गोलीबारी कर तहस-नहस कर दिया था। फिलहाल रूस ने तालिबान सरकार को मान्यता दे रखी है।

भारत और तालिबान के संबंध कैसे हैं?

तालिबान ने भारत से भी कूटनीतिक संबंध बढ़ाए हैं। भारत ने अफगानिस्तान में संसद भवन और सिंचाई के लिए बांध बनवाने में मदद दी थी। चाबहार बंदरगाह बनाने के लिए भी भारत ने निवेश किया ताकि अरब सागर से होते हुए आयात-निर्यात में सुविधा हो सके। तालिबान यद्यपि महिलाओं पर कड़ी बंदिश लगाता है। वहां महिलाओं को पढ़ने-लिखने, घर से बाहर अकेले निकलने, गैर मर्द से बात करने की मनाही है। उन्हें सिर से पैर तक पर्दे में रहना पड़ता है। इसके बावजूद पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखने के लिए तालिबान की मौजूदगी भारत के हित में है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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