Mutual Trust Between Neighbors: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हम आपके साथ आपसी विश्वास बढ़ाने का समझौता करना चाहते हैं। इसे अंग्रेजी में कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स कहते हैं। ऐसा करने से एक-दूसरे की नीयत पर शक करना कम हो जाएगा।'
हमने कहा, 'यह तो बड़े शर्म की बात है। क्या अब तक आपको हम पर विश्वास नहीं था? आप हमारे पुराने पड़ोसी रहे हैं फिर भी इस तरह का बेढब प्रस्ताव रख रहे हैं। याद कीजिए वह दिन जब आप सपरिवार कहीं जाते समय अपने घर की चाबियां हमारे पास छोड़ जाते थे और हमसे अनुरोध करते थे कि हमारे अपार्टमेंट की रखवाली कीजिएगा और बिजली-पानी का बिल आए तो संभालकर अपने पास रख लीजिएगा। आज आप आपसी विश्वास बढ़ाने की बात किस मुंह से कर रहे हैं?'
पड़ोसी ने दृढ़ता से कहा, 'निशानेबाज, आप व्यर्थ ही भावुक हुए जा रहे हैं। समय के साथ थोड़ा प्रैक्टिकल बनिए। अब तक हमारे संबंध कैसे रहे, इसे भूल जाइए। आप खुद को भारत और हमें चीन मान लीजिए। परस्पर विश्वास मजबूत करने की दिशा में हम कदम उठाएं तो अच्छा रहेगा। जब सदियों पुराने पड़ोसी देश आपस में भरोसा बढ़ाने की पहल करते हैं तो हम और आप क्यों पीछे रहें? यदि आप इसके लिए तैयार हैं तो मैं उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल लेकर आपके यहां आता हूं जिसमें हमारी झगड़ालू पत्नी और शरारती बच्चों का समावेश होगा। आप हमारे भव्य स्वागत और बढ़िया जलपान की तैयारी रखिएगा। विश्वास बढ़ाने के लिए कुछ परिश्रम तो आपको करना ही होगा।'
हमने कहा, 'जब हम लोगों के बीच कोई विवाद या असहमति नहीं है तो समझौता कैसा? जरा सोचिए कि हमने इतने वर्षों में तरह-तरह की वस्तुओं और विचारों का आदान-प्रदान किया है।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, इमोशनल बनने से काम नहीं चलेगा। पड़ोस के संबंध कब बिगड़ेंगे, कहा नहीं जा सकता! कितने ही लोग अपने बच्चों से पड़ोसी के घर की जासूसी करवाते हैं। अपने घर का सारा कूड़ा-कचरा चुपके से पड़ोसी के आंगन में फेंकते हैं। पड़ोसी के दरवाजे पर पड़ा अखबार या फूलों का गमला उठाकर ले जाते हैं। हम मानते हैं कि आप इस तरह के पड़ोसी नहीं हैं फिर भी पंचशील की भावना पर आधारित समझौता कर लेते हैं।'
हमने कहा, 'ऐसा समझौता तोड़कर चीन ने भारत की 22,000 वर्गमील जमीन हड़प ली थी। विश्वास कागज पर नहीं, दिलों में होना चाहिए।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा