हरियाणा के पशु मेले में 15 करोड़ रुपये का मुर्राह भैंसा ‘विधायक’ नाम से चर्चा में है।
भैंसे के नाम को माननीयों के अपमान से जोड़ने पर व्यंग्य।
यमराज के वाहन से लेकर महिषासुर तक, भैंसे का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बताया गया।
नाम में क्या रखा है के जरिए नामकरण पर उठे विवाद पर कटाक्ष।
Haryana Buffalo Fair Political Naming Controversy: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, क्या किसी भैंसे का नाम 'विधायक' रख देना अच्छी बात है? यदि अभी इस पर रोक नहीं लगाई गई तो पशुपालक आगे चलकर अपने भैंसे को मंत्री, मुख्यमंत्री या सांसद कहने लगेंगे। ऐसा नाम देना माननीयों के लिए अपमानजनक है। इसके खिलाफ मर्यादा भंग प्रस्ताव या प्रिविलेज मोशन लाया जाना चाहिए।'
हमने कहा, 'भैंसे का कुछ भी नाम रख दो, वह रहेगा तो भैंसा ही! शेक्सपीयर ने भी कहा था-व्हाट इज इन ए नेम! नाम में क्या रखा है। भैंसे को युवराज, राजा, महाराजा, शहंशाह, बादशाह कुछ भी कहो, क्या फर्क पड़ता है!'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हरियाणा में चल रहे राज्यस्तरीय पशु मेले में 15 करोड़ रुपये कीमत का मुर्राह नस्ल का भारी भरकम ऊंचा-पूरा भैंसा आकर्षण का केंद्र बना है। यह प्रजनन के काम आता है। इसे काफी महंगी खुराक खिलाई जाती है। इसके मालिक ने इसे 'विधायक' नाम दिया है। क्या यह आपत्तिजनक नहीं है?'
हमने कहा, 'भैंसा भी कम महत्व नहीं रखता। यमराज का वाहन भैंसा है। दुर्गा देवी ने जिस राक्षस का त्रिशूल से वध किया था उसकी आकृति भैंसे की थी और उसका नाम महिषासुर था। कर्नाटक के मैसुरु में महिषासुर का पुतला है। भैंस को मराठी में 'म्हैस' और शुद्ध हिंदी में 'महिषी' भी कहते हैं। राजमहिषी का अर्थ 'महारानी' होता है। भैंस को लेकर कहावतें हैं-अक्ल बड़ी या भैंस ! काला अक्षर भैंस बराबर! भैंस के आगे बीन बजाई, वह बैठी पगुराई ! थाईलैंड और मलेशिया में पहले भैंसे से खेत जोते जाते थे।
छत्तीसगढ़ के देहातों में अब भी भैंसागाड़ी चला करती है। पहले मेले-ठेले में शराब पिलाकर भैंसें लड़ाए जाते थे। उनकी टक्कर देखने भीड़ उमड़ पड़ती थी। अमेरिका में जो लोग नियाग्रा फॉल देखने जाते हैं उन्हें 'बफेलो' नामक शहर जाना पड़ता है, जो कनाडा बॉर्डर पर है। वहां से इस जलप्रपात का नजारा बहुत रोमांचकारी और अविस्मरणीय लगता है। अंग्रेजी में भैंस को 'बफेलो' कहते हैं। इसलिए भैंसे को 'विधायक' कहने का बुरा मत मानिए।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा