Incongruous Electoral Alliances In Indian Politics: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, राजनीति में होने वाले बेमेल गठबंधन को देखकर हमें कहावत याद आती है- राम मिलाई जोड़ी, एक अंधा एक कोढ़ी! ऐसा लगता है कि जब किसी पार्टी को खुद की लोकप्रियता या ताकत पर भरोसा नहीं रहता तो वह गठबंधन बनाकर चुनावी चक्रव्यूह रचती है। हमें बताइए कि गठबंधन के बारे में आपकी क्या राय है?'
हमने कहा, 'समाज गठबंधन के आधार पर खड़ा है। बगैर परस्पर सहयोग के कुछ नहीं होता। अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। परिवार का आधार वैवाहिक गठबंधन है जिसके लिए किसी पंडित से शुभ मुहूर्त निकलवाना पड़ता है। इसके अलावा जन्मपत्री और गुण मिलाने पड़ते हैं। फिर तय करना पड़ता है कि गठबंधन गोरज मुहूर्त में होगा या गोधूली बेला में।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हमें शादी-ब्याह वाले गठबंधन की बात नहीं सुननी है। देश की राजनीति में बीजेपी नेतृत्व का एनडीए गठबंधन है तो कांग्रेस नेतृत्व का इंडिया गठबंधन। अकेली पार्टी चुनाव जीत नहीं सकती और यदि जीत गई तो सरकार बनाने लायक मेजॉरिटी नहीं मिल पाती। इसलिए गठबंधन की राजनीति चल पड़ी है। जो नेता चुनावी गठबंधन करते हैं, वे जानते हैं कि मिल-बांटकर खाने तथा हमप्याला-हमनिवाला बनने से आपस में प्रेम बढ़ता है।'
हमने कहा, 'राजनीति में प्रेम नहीं, स्वार्थ होता है। यह मतलब की यारी होती है। इसीलिए चुनाव के पहले और चुनाव के बाद दो प्रकार के गठबंधन बनते हैं। कुछ पार्टियां एक गठबंधन से निकलकर दूसरे में चली जाती हैं। पानी तेरा रंग कैसा, जिसमें मिलाया उस जैसा! आपने देखा कि नीतीश कुमार कैसे पलटी मारते रहे हैं।
जब वह यूपीए में थे तो मोदी के साथ फोटो खिंचाना उन्हें मंजूर नहीं था अब वह एनडीए में मोदी के साथ हैं। अगले चुनाव में क्या करेंगे, मालूम नहीं! जब गठजोड़ कमजोर होने लगता है तो पार्टियां उसे छोड़कर छिटकने लगती हैं। ऐसी हालत में कहा जा सकता है- देखी जमाने की यारी, बिछुड़े सभी बारी-बारी। फिलहाल देखिएगा कि यूपी और पंजाब के विधानसभा चुनाव के लिए कैसा गठबंधन बनता है।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा