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नवभारत संपादकीय: दुनिया का नक्शा कितना सही? मर्केटर मैप ने ऐसे बदला देशों का आकार

Mercator Map Distortion: 1569 में गेरार्ड मर्केटर ने ऐसा विश्व मानचित्र बनाया, जिसमें यूरोप, रूस और उत्तरी अमेरिका बड़े दिखते थे, जबकि अफ्रीका और भारत का आकार वास्तविकता से छोटा नजर आता था।

अंकिता पटेल

Mercator Map India Africa: किसी भी देश या भूखंड का नक्शा पूरी तरह सही या दिर अचूक होना चाहिए, उसके आकार को अनुपातिकः दृष्टि से सही तरीके से रेखांकित करना आवश्यक है। सदियों से अफ्रीका महाद्वीप और भारत को वास्तविक आकार की तुलना में छोटा दिखाया जाता रहा। ऐसा विश्व का नक्शा गेरार्ड क्रेमर नामक जर्मन व्यक्ति ने 1569 में बनाया था।

मर्केटर मैप कहलाने वाला यह मानचित्र पानी के जहाजों के आवागमन की सुविधा के दृष्टिकोण से बना था। इस दोषपूर्ण नक्शे में यूरोप, उत्तरी अमेरिका और रूस का आकार अनावश्यक रूप से बड़ा दर्शाया गया था। भारत की तुलना में दो तिहाई आकार का ग्रीनलैंड इतना बड़ा दिखता था कि वह अफ्रीका महाद्वीप जितना दिखता था।

मर्केटर मैप की खामी उजागर

इस मर्केटर मैप की खामी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सामने आ गई, जो जर्मनी से लेकर रूस के लेनिनग्राद तक व्याप्त हो गया था। तब सैनिक रणनीतिकारों ने अनुभव किया कि दूरी को लेकर उनके अनुमान पूरी तरह गलत साबित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, मर्केटर मैप के आधार पर मंगल, बृहपति तथा शुक्र ग्रहों की दूरी का भी विचार किया गया। गूगल मैप भी मर्केटर पर आधारित थे।

आखिर गत शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इक्वल एरिया मैप (समान क्षेत्र मानचित्र) के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया। यह विभिन्न देशों और द्वीपों के तुलनात्मक आकार का प्रतिनिधित्व करता है। केवल अमेरिका ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। वजह यह है कि वह विश्व के नक्शे में छोटे आकार का ग्रीनलैंड देखना नहीं चाहता, जबकि नए मानचित्र में भी ग्रीनलैंड का आकार टेक्सास और कैलिफोर्निया राज्यों से दोगुना दर्शाया गया है।

नए विश्व मानचित्र से मर्केटर की सदियों पुरानी गलती सुधरी

भारत ने विश्व के नए मानचित्र का स्वागत किया है, लेकिन उसकी मांग है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के अधिकृत नक्शे के अनुसार दिखाया जाए। यद्यपि सही और वास्तविक आकार को नए वैश्विक मानचित्र का आधार बनाया गया है। फिर भी मर्केटर मानचित्र का महत्व कम नहीं होता। वह नौवहन के हिसाब से उपयोगी था तथा मानव की प्रगति के प्रयासों में उसका योगदान था। संयुक्त राष्ट्र ने 2018 में विकसित किए गए इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन को स्वीकार कर सदियों पुरानी गलती को दूर किया है।

मर्केटर मैप में भूमध्य रेखा से उत्तर के क्षेत्रों को अनावश्यक रूप से बड़ा दर्शाया गया था। इसके विपरीत अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका व दक्षिण एशिया का आकार छोटा दिखाया गया था। ग्रीनलैंड से अफ्रीका महाद्वीप 14 गुना बड़ा होने पर भी ग्रीनलैंड को बड़ा दिखाया गया था। इस तरह मर्केटर मैप दोषपूर्ण था और उसकी वजह से राजनीतिक मानचित्र भी प्रभावित हुए थे। अब नए मानचित्र में दक्षिण अमेरिका की चौड़ाई सही दिखाई गई है और यूरोप का असंतुलित फैलाव सिकोड़ा गया है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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