Maharashtra Drought Rural Migration: इस समय महाराष्ट्र के 36 में से 20 जिलों में सूखा स्थिति देखी जा रही है। वहां जलस्रोतों में बहुत कम पानी शेष रह गया है। विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के अनेक जिलों में स्थिति गंभीर है। वर्षा की अनिश्चितता की वजह से कृषि रोजगार घटते जा रहे हैं जिससे भूमिहीन कृषि मजदूर, अल्प भूधारक किसान व असंगठित ग्रामीण श्रमिकों का बुरा हाल हो गया है। गांव में काम उपलब्ध नहीं होने से जीवनयापन मुश्किल हो जाता है और कर्ज का बोझ लद जाता है।
ऐसी परिस्थिति में गांव छोड़ने की नौबत आ जाती है। गांव से दूर जाकर शहर में मजदूरी करने पर ठेकेदार उनका शोषण करते हैं। असुरक्षित स्थितियों में जोखिम का काम करना पड़ता है। अपना गांव छोड़कर जाने से बच्चों की पढ़ाई, पोषण, अन्नसुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा व टीकाकरण प्रभावित होता है। महिलाओं को भी मजदूरी करने के साथ ही घर व बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है।
गन्ना तुड़ाई या ईंट भट्टे के काम में लगने से सामान्य जीवन बदल जाता है। गांव की सामाजिक आधार व्यवस्था पीछे छूट जाती है। नई जगह पर हर प्रकार की असुरक्षा घेर लेती है। सूखे की वजह से मराठवाड़ा और विदर्भ मराठवाड़ा और विदर्भके ग्रामीण क्षेत्र से बड़ी तादाद में लोग शहरों में रोजगार खोजने जाएंगे।
प्रशासन को विचार करना होगा कि क्या गांव के लोगों को कोई विकल्प देकर उनका पलायन रोका जा सकता है? उन्हें गांव में ही वीबी-जी रामजी योजना में काम उपलब्ध कराया जाए। यदि वह गांव छोड़कर जाते हैं तो उनकी सामाजिक सुरक्षा व बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखना होगा। बड़ी तादाद में गन्ना तुड़ाई करने वाले मजदूरों के परिवारों का अपने गांव से बाहर पलायन होगा। शक्कर आयुक्तालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कहीं भी श्रमिकों के शोषण का मामला सामने आया तो शक्कर कारखाने का लाइसेंस रद्द किया जाएगा।
मुद्दा उन्हें समय पर सही मजदूरी देने का भी है। मजदूरों का स्थलांतर बढ़ना तय है। क्या प्रशासन इसके लिए तैयार है? मौसम की मार से किसानों की उम्मीदें चूर-चूर हो गई हैं। मूंग, उड़द सहित खरीफ की फसलें सूख गई हैं। वर्षा नहीं होने से पौधे में दाना ही नहीं भरा! त्योहार के मौके पर किसान भारी अभाव व आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। लगातार दूसरे वर्ष किसानों की फजीहत हो रही है।
ऐसी विषम परिस्थिति में विपक्ष ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए तुरंत सूखा घोषित करने की मांग की है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने फसलें सूखने की वजह से किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये मुआवजा देने और पूर्ण कर्ज माफी की मांग की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नुकसान का पंचनामा कर किसानों को हर संभव राहत प्रदान करने का आश्वासन दिया है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा