भारतीय प्रवासी फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
नवभारत विशेष

नवभारत विशेष: विदेशी धरती पर सफलता या सुरक्षा की चिंता? भारतीय प्रवासियों के सामने बढ़ती चुनौतियां

Indian Diaspora: भारतीय प्रवासियों की सफलता के बावजूद विदेशों में सुरक्षा और आव्रजन संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में भारत में बेहतर अवसर और सुरक्षित भविष्य बनाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।

अंकिता पटेल

Highlights

  • दुनिया में करीब 4 करोड़ भारतीय प्रवासी हैं, लेकिन विदेशों में सुरक्षा और समृद्धि की उम्मीदों पर सवाल उठ रहे हैं।

  • अमेरिका में इमिग्रेशन छापों के बीच बेहतर भविष्य की तलाश में गए भारतीय मजदूर और कर्मचारी भी निशाने पर आए।

  • शिकागो, उटाह और कैलिफोर्निया में हिंदू मंदिरों पर हमले या तोड़फोड़ की घटनाओं का जिक्र।

  • विदेशों में सफलता का जश्न मनाने के साथ भारत को भी तरक्की और अवसरों के लिहाज से आकर्षक बनाने पर जोर।

Indian Migrants Safety and Opportunities in India: भारतीय प्रवासियों की संख्या लगभग 4 करोड़ है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। वे खूब सफल भी हैं। अमेरिका में रहने वाले एक औसत भारतीय-अमेरिकी परिवार की सालाना कमाई 1,51,000 डॉलर है, जो पूरे अमेरिका के औसत से लगभग 75 प्रतिशत अधिक है, लेकिन विदेशी धरती पर सुरक्षा और समृद्धि की जो चमक दिखाई देती थी, वह अब एक मरीचिका बन चुकी है। जैसे-जैसे विकसित पश्चिमी देश अपने दरवाजे भारतीयों के बंद करते जा रहे हैं, हमें अपने देश में ही रुकने को और उसे अधिक आकर्षक बनाने को प्राथमिकता देनी होगी।

विदेशों में भारतीय मूल के किसी व्यक्ति को मिली सफलता का जश्न मनाना अच्छा है, लेकिन राष्ट्रीय गर्व इसी में निहित है, जब भारतीय अपने ही देश में तरक्की करें। बीते हफ्ते अमेरिकी इमीग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आइस) ने कैलिफोर्निया से कैंसस तक ग्रामीण इलाकों, खेतों में ताबड़तोड़ छापे मारे, अन-डॉक्यूमेंटेड प्रवासियों की धरपकड़ के शिकार बने वे लाखों भारतीय कृषि मजदूर और कर्मचारी जो बेहतर भविष्य की तलाश में वहां गए थे। इसी दौरान शिकागो के एक हिंदू मंदिर पर हमले की कोशिश में एक युवक धराया, जिसने भारतीयों को 'अमानवीय' कहा था। इसके अलावा, उटाह में एक कृष्ण मंदिर पर गोलीबारी हुई, कैलिफोर्निया में एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ हुई।

अमेरिका में सख्त इमिग्रेशन नियमों से भारतीयों की मुश्किलें बढ़ीं

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त संरक्षणवादी नीतियों और कड़े आवजन नियंत्रणों के कारण आज अमेरिका में बसने की इच्छा रखने वालों की संख्या घटकर आधी रह गई है। इसका असर केवल अवैध प्रवासियों पर नहीं, बल्कि वैध विदेशी विद्यार्थियों, अस्थायी कर्मचारियों और भविष्य में स्थायी निवास चाहने वालों पर भी पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों को रोजगार देने की नीतियां, वीजा और निवास नियमों का कड़ाई से पालन भारतीय कामगारों के लिए चुनौतियां पैदा कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालन और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से आईटी, ग्राहक सेवा और प्रशासनिक नौकरियों की प्रकृति बदल रही है।

पूरे पश्चिम में दक्षिणपंथी और आव्रजन-विरोधी राजनीति का प्रभाव चरम पर है। इसी महीने ट्रंप ने कई भारतीय कंपनियों सहित कई टेक फर्मों को अपने कर्मचारियों के लिए परमानेंट रेजिडेंसी को प्रायोजित करने से रोक दिया और उन पर इमिग्रेशन फ्रॉड का आरोप लगाया। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया, कतर, अमेरिका और म्यांमार जैसे 52 देशों से तकरीबन 2 लाख भारतीयों को निर्वासित किए जाने का आंकड़ा सामने है।

विदेश जाने की अंधी दौड़ पर सवाल, भारत में अवसरों का लाभ उठाएं

2021-2025 के दौरान संयुक्त अरब अमीरात से 22,209, कतर से 5,319 और सऊदी अरब से सवा लाख से अधिक भारतीय निर्वासित किए जा चुके हैं। हमारी जीडीपी की रफ्तार पर्याप्त तेज है, हम विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं, तब भी विकसित देशों की ओर रुख करने की अंधी दौड़ कितनी तार्किक है? अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के कारोबारियों, कार्यकारी अधिकारियों और राजनेताओं की उपस्थिति भले ही दमदार दिखती हो, पर वहां की राजनीति में उनकी भूमिका इतनी प्रभावी नहीं है कि वे भारतीय प्रवासियों के खिलाफ होने वाले कठोर नीतिगत फैसलों का प्रतिकार कर सकें।

मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से दुनिया की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में से केवल 8 भारत की हैं। जब भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा घरेलू बाजार, पर्याप्त और सस्ता कुशल श्रम, तेजी से सुधरता बुनियादी ढांचा और एक विकास-समर्थक सरकार मौजूद है, तब विदेशों को प्राथमिकता देना तार्किक रूप से उचित नहीं लगता।

यहीं रहकर विकसित भारत बनाएं

अब भारतीयों को यह स्वीकार करना होगा कि परदेस में जलालत झेलने से कहीं अधिक श्रेयस्कर और गरिमापूर्ण अपने देश में रहकर इसे 'विकसित भारत' बनाना है। विदेश में अपना भविष्य तलाशने से अधिक श्रेयस्कर अपने देश में रहकर उसका भविष्य गढ़ना होगा।

सरकार को गुणवत्तापूर्ण अवसरों का सृजन, मानव सम्मान देकर विदेशों का रुख करने वालों को रोकने की कोशिश करनी चाहिए, पूंजी में निवेश तथा सख्त कानूनी और व्यापारिक सुधार पर कृत संकल्प होकर नागरिकों को अवसर और सम्मान देकर विदेशों का रुख करने वालों को रोकने की कोशिश करनी चाहिए।

लेख-संजय श्रीवास्तव के द्वारा

नेहा बोरा पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आज, 10 हजार के बॉन्ड वाले नोटिस को दी चुनौती, सौरव-रांका ने दिखाया ठेंगा

अंगूर खट्टे हैं तो बेल काटने लगे, दिल्ली प्रोटेस्ट पर पहली बार बोले PM मोदी; राहुल गांधी को बताया फेल प्रोडक्ट

दिल्ली नगर निगम में क्यों भिड़े AAP-कांग्रेस पार्षद? विकास फंड से शुरू हुआ विवाद, हाथापाई तक पहुंची बात- VIDEO

नेहा बोरा ने CJP से किया किनारा, हाई कोर्ट में कहा- तिरंगा फहराने के लिए अनुमति जरूरी नहीं; कब आएगा फैसला?

सोनम का झलका दर्द, सरकार पर लगाया वादा खिलाफी का गंभीर आरोप; कहा चीन लद्दाख को नहीं मानता भारत का हिस्सा