प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
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नवभारत विशेष: यूपी में धड़ल्ले से चल रहा हाफ एनकाउंटर

Yogi Crime Control: योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी में अपराध नियंत्रण का नया मॉडल सामने आया है। हाफ एनकाउंटर नीति से अपराधियों में खौफ पैदा हुआ और पुलिस की कार्यशैली पूरी तरह बदल गई।

अंकिता पटेल

UP Police Encounter Policy: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का अपराध नियंत्रण स्टाइल अब पूरे देश में चल निकला है। एक समय था, जब चोरी, छीना-झपटी, मारपीट, डकैती, चेन स्नैचिंग, महिला अपराध जिसमें छेड़खानी प्रमुख था, अवैध रूप से जमीनों पर कब्जा करना, अपहरण और भी न जाने कैसे-कैसे अपराधों पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस के पास दो तरीके थे।

एक अपराधी को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ करना। पूछताछ के लिए वह थर्ड डिग्री तरीका अपनाती थी। लेकिन इसके बाद भी अपराधियों पर कोई खास असर नहीं होता था, पर जब से उत्तरप्रदेश की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथ आई, तब से अपराधियों को लगने लगा है कि उनकी जान सांसत में है।

योगी ने इसके लिए जो तरीका अपनाया वह था हाफ एनकाउंटर। पूछताछ में थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करना खतरनाक माना जाता था। थर्ड डिग्री का मतलब तलवों पर मारना, मिर्ची डालकर छोड़ देना, उल्टा लटकाना, बर्फ की सिल्ली या धूप में बांधे रखना था। इतना सब करने के बाद भी अपराधियों पर उतना असर नहीं था।

एनकाउंटर में अपराधी को आमने-सामने की मुठभेड़ में मौत मिलती थी, लेकिन कई बार पुलिस के जवान भी शहादत को प्राप्त होते थे। मुख्यमंत्री योगी ने इसका जो तोड़ निकाला वह कानून के अनुसार ही माना जाता है, इसमें भागते अपराधी को रोकने के लिए उसके शरीर के निचले अंगों पर फायर करने की छूट थी।

बस यही बात अपराधियों के लिए थर्ड डिग्री तथा एनकाउंटर से भी खतरनाक सिद्ध हुई। पुलिस को इस हाफ एनकाउंटर के साथ ही मदद मिली ऑपरेशन लंगड़ा, बुलडोजर एक्शन से। हाफ एनकाउंटर का डर कितना होता है यह सोशल मीडिया और न्यूज चैनल पर जब अपराधियों को दिखाया जाता है, तो साफ नजर आता है।

अधिकतर के कपड़े जगह-जगह से फटे नजर आते हैं। किसी का सीधा पैर गोली लगने से या कूदने से टूटने के कारण घायल होता है, कई के हाथ-पैर भी घायल होते हैं। कभी-कभी गंभीरता से देखें तो दो में से एक अपराधी का दायां तो दूसरे का बायां पैर घायल होता है। जब वह पुलिस या अन्य किसी का सहारा लेकर चलते हैं या उनकी परेड सार्वजनिक रूप से निकलती है तो उनकी आंखें डर के मारे कांपती नजर आती हैं।

हालांकि हाफ एनकाउंटर का काफी विरोध भी हुआ है लेकिन सीएम योगी एक ही बात करते हैं कि अगर अपराधी गोली चलाएगा, तो क्या पुलिस गोली खाएगी? वह भी तो गोली चलाएगी? मीडिया विशेषज्ञ मानते हैं कि जंगलों में जहां पर आम आदमी कभी जाता ही नहीं है, वहां पर सरकारी जमीनों पर धर्मस्थलों के नाम पर कब्जा कैसे हो रहा है? अगर इसके लिए बुलडोजर सफाई अभियान चल रहा है, तो गलत क्या है? लड़की को अकेले में छेड़ना, उसकी चेन खींचकर भाग जाना, उसके साथ दुर्व्यवहार करना, समाज के लिए गलत संदेश देता है और अगर अपराधी को सबक देने के लिए पुलिस कड़े कदम उठा रही है, तो यह खींचतान क्यों? सुप्रीम कोर्ट ही नहीं हाईकोर्ट ने भी इस पर एक्शन लेते हुए इसे बेहद गंभीर माना है और कहा है कि आरोपी को सजा देना पुलिस का काम नहीं है, यह अधिकार सिर्फ न्याय पालिका के पास है। बढ़ती हाफ एनकाउंटर की प्रवृति को शासन तथा संविधान के खिलाफ कहते हुए कोर्ट ने कई मामलों में संदिग्धता की बात भी कही।

थर्ड डिग्री से भी ज्यादा खतरनाक

हाफ एनकाउंटर और बुलडोजर एक्शन अब उत्तर प्रदेश से निकलकर राजस्थान में भी आ गया है, बिहार में भी और गुजरात में भी। मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, झारखंड में भी बुलडोजर की धमक अपराधियों द्वारा हथियाई गई सरकारी-गैरसरकारी संपत्ति को मुक्त कराने के लिए सुनाई दे रही है।

उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है और दूसरे राज्यों में अब तक कम से कम दो हजार से अधिक मामले सामने आए हैं। अब बदमाश पुलिस के पास जाकर गिरफ्तार करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।

पिछले नौ वर्षों में दस हजार से अधिक मामले हाफ एनकाउंटर के सामने आए हैं। खुद उत्तर प्रदेश की पुलिस ने माना है कि करीब 13 हजार आरोपियों को मुठभेड़ में घुटने के नीचे गोली मारी गई या लगी। उत्तर प्रदेश में पुलिस पर हमला करने वाले 207 मारे गए,

–लेख मनोज वाष्र्णेय के द्वारा

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