Godzilla El Nino India Impact: विश्व मौसम संगठन ने चेतावनी जारी की है कि 'गॉडजिला अलनीनो' की वजह से भारत अगले 6 महीनों के लिए डेंजर जोन में पहुंच गया है। प्रशांत महासागर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है, इस वजह से इस साल सर्दियों का मौसम या तो आएगा ही नहीं या फिर इसका असर बहुत कम हो सकता है।
इस बार सर्दी के मौसम में कड़ाके की ठंड की जगह गर्मी महसूस हो सकती है। इस मौसमी दुष्चक्र की वजह से बड़े पैमाने पर फसलें खराब हो सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों ने महासागर की सतह पर ही नहीं, उसके नीचे भी असाधारण गर्मी दर्ज की है। कुछ क्षेत्रों में तो उप-सतही समुद्री तापमान सामान्य से 8 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक पाया गया है।
वास्तव में अलनीनो कोई तूफान नहीं है और न ही कोई अलग मौसम प्रणाली। यह पृथ्वी की महासागरीय-वायुमंडलीय व्यवस्था में होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव है। भूमध्य रेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इस गर्मी से हवाओं, बादलों और वायु दाब के वैश्विक पैटर्न बदलते हैं। लेकिन समस्या यह है कि महासागर और वायुमंडल किसी एक देश की सीमा में कैद नहीं रहते। इसलिए प्रशांत महासागर में शुरू हुआ मौसम का यह डरावना बदलाव भारत तक पहुंच सकता है और नहीं भी पहुंच सकता।
मानसून की धाराओं और वर्षा प्रणालियों में ऐन वक्त पर बदलाव हो सकता है। इस कारण अलनीनो को लेकर यह चेतावनी डराती तो है, लेकिन जरूरी नहीं है कि हमें इसका सामना करना ही पड़े। विश्व मौसम संगठन अलनीनो को कमजोर, मॉडरेट, स्ट्रॉन्ग या वेरी स्ट्रॉन्ग श्रेणी में ही देखता है। सुपर अलनीनो या गॉडजिला अलनीनो जैसे शब्द विश्व मौसम संगठन के नहीं, बल्कि इस डिजिटल युग की मीडिया के शब्द हैं।
भारत सरकार ने भी जुलाई में संसद में वक्तव्य दिया था कि विश्व मौसम संगठन या भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा सुपर अल नीनो जैसी कोई आधिकारिक श्रेणी या शब्दावली निर्धारित नहीं की है। अगर विश्व मौसम संगठन ने कहा है कि भारत डेंजर जोन में है, तो डेंजर जोन का अर्थ यह है कि आने वाले महीनों में मौसम से जुड़े जोखिम सामान्य से अधिक हो सकते हैं। ऐसे में इस चेतावनी को हमें गंभीरता से लेना चाहिए, मजबूत अल नीनो से दुनियाभर में तापमान और वर्षा के पैटर्न में बदलाव आ सकता है। इस कारण कहीं सूखा, कहीं बाढ़ और कहीं असामान्य गर्मी बढ़ सकती है।
सितंबर, नवंबर 2026 के लिए विश्व मौसम संगठन ने विश्व के लगभग सभी भू-भागों में सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताई है। लेकिन भारत के लिए खतरा केवल तापमान नहीं है, कृषि, जल, संसाधन, बिजली की मांग, स्वास्थ्य और खाद्य कीमतें ये सब चीजें मौसम से ही जुड़ी हैं। इसलिए यदि बारिश का पैटर्न बिगड़ता है तो इसका असर खेत से बाजार तक पहुंच सकता है। विश्व मौसम संगठन की चेतावनी को अपने हिसाब के सनसनीखेज शब्दों से सजाकर मीडिया ने यह बात रखी है। क्योंकि सर्दी का मौसम केवल अल नीनो से ही तय नहीं होता। भारत की सर्दी के कई प्रमुख कारक हैं।
मसलन पश्चिमी विक्षोभ, हिमालय और मध्य एशिया की मौसम प्रणालियां, बर्फबारी, जेट स्ट्रीम, हिंद महासागर की स्थितियां और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियां। इसलिए संभव है कि औसत तापमान सामान्य से काफी अधिक रहे, हो सकता है कुछ क्षेत्रों में ठंड के दिन पिछले वर्षों के मुकाबले कम हों या ठंड का स्तर अलग हो अथवा उसका स्वरूप बदला हुआ है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली, उत्तर भारत या पूरा देश आने वाले सर्दी के मौसम में सर्दी से रहित होगा। विश्व मौसम संगठन की इस चेतावनी को डर का विषय नहीं बनाना चाहिए, बल्कि उसके कहने के अंदाज से मौसम की गंभीरता को समझना चाहिए।
विश्व मौसम विभाग अलनीनो को कमजोर, मॉडरेट, स्ट्रॉन्ग या वेरी स्ट्रॉन्ग श्रेणी में ही देखता है। सुपर अलनीनो या गॉडजिला अलनीनो जैसे शब्द विश्व मौसम संगठन के नहीं, बल्कि इस डिजिटल युग की मीडिया के शब्द हैं। 'गॉडजिला अलनीनो' की वजह से भारत अगले 6 महीनों के लिए डेंजर जोन में पहुंच गया है।
लेख- वीना गौतम के द्वारा