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Navabharat Nishanebaaz: एकलव्य ने काटा था अपना अंगूठा, अब भी परीक्षा में घोटाला अनूठा

Exam Paper Leak: परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर बढ़ती चिंता के बीच शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। लेख में महाभारत के प्रसंगों के जरिए अवसर और न्याय की चर्चा की गई है।

अंकिता पटेल

NEET CUET Exam Irregularities: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, परीक्षाओं में हो रही धांधली से हम बहुत परेशान हैं। नीट, सीबीएससी, सीयूईटी-यूजी जैसी परीक्षाओं में कहीं पेपर लीक है तो कहीं तकनीकी या प्रशासकीय गलती! छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है।'

हमने कहा, 'परीक्षा में घोटाला कोई नई बात नहीं है। पहले भी बहुत कुछ होता था। द्रोणाचार्य ने अपने शिष्य अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनाए रखने के लिए गुरुदक्षिणा के नाम पर एकलव्य का अंगूठा कटवा दिया था। इस अन्याय और भेदभाव के बावजूद द्रोणाचार्य के नाम पर खेल पुरस्कार दिए जाते हैं। इतना ही नहीं, युद्ध में इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोन भी हमें द्रोणाचार्य के युद्ध कौशल की याद दिलाते हैं, जिसका महाभारत में वर्णन है। दूसरा उदाहरण परशुराम का है, जो भीष्म और कर्ण दोनों के गुरु थे। उन्होंने अपनी पहचान छुपाने की वजह से कर्ण को शाप दिया था कि वह ऐन मौके पर अपनी शस्त्रविद्या भूल जाएगा।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, पहले मेधावी शिष्यों के लिए गुरु शॉर्ट टर्म कोर्स चलाते थे। रामायण में लिखा है गुरु गृह पढ़न गए रघुराई, अल्प काल विद्या सब आई। राम के गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र थे तो कृष्ण-बलराम के गुरु सांदीपनी!'

हमने कहा, 'कहां प्राचीन भारत की गुरुकुल पद्धति और कहां आज के महंगे कोचिंग इंस्टीट्यूट । अब तो लाखों रुपए दो और परीक्षा के पहले ही पेपर आउट करा लो। इंसान पेपर देता है और मशीन उसे जांचती है। सीबीएसई ओसीएम या ऑनस्क्रीन माकिंग सिस्टम से आंसर शीट जांचता है। परीक्षा प्रणाली की प्रामाणिकता संदेह के घेरे में आ गई है। यूनिवर्सिटी भी किसी एजेंसी को ठेका देकर उससे पेपर जंचवाती है जबकि परीक्षक मुंह ताकते रह जाते हैं। छात्र की स्थिति देखकर कहना पड़ता है कि अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंस गया है तू।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, परीक्षा को उर्दू में इम्तिहान कहते हैं। आपने गीत सुना होगा जिंदगी इम्तिहान लेती है, आशिकों की जान लेती है! अब आशिक की जान नहीं, बल्कि छात्रों का भविष्य खतरे में है। भगवान कृष्ण ने अश्वत्थामा के ब्रम्हाख से उत्तरा के गर्भमें पल रहे परीक्षित की प्राणरक्षा की थी। आज परीक्षा देने वाले ईमानदार छात्रों को बेईमानी और भ्रष्टाचार से कौन बचाएगा?'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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