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क्या आतिशी लौटाएंगी केजरी को कुर्सी, घेर तो नहीं लेगी सत्ता की आशिकी

अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा दांव खेलते हुये दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दिया और अपनी जगह आतिशी को मुख्यमंत्री बनाया। अब सवाल यह है कि क्या आतिशी अरविंद केजरीवाल को वापस से कुर्सी सौंपेंगी? इसके जवाब में नवभारत के 'निशानेबाज' ने क्या कुछ कहा आप इस आर्टिकल में पढ़ सकते हैं।

मृणाल पाठक

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा दांव खेलते हुये दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दिया और अपनी जगह आतिशी को मुख्यमंत्री बनाया। अब बताइए कि आतिशी कौन सी आतिशबाजी करेंगी?’ हमने कहा, ‘केजरीवाल की चाल बिल्कुल सही और दूरदर्शितापूर्ण है। अपनी पत्नी सुनीता को उन्होंने मुख्यमंत्री नहीं बनाया। इस वजह से कोई उन पर परिवारवाद का आरोप नहीं लगा सकता। अपने अन्य सहयोगियों की तुलना में केजरीवाल ने आतिशी पर पूरा भरोसा जताया जो भविष्य में केजरी को अपनी कुर्सी लौटा सकती हैं।’

पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, मुद्दा ईमानदारी व वचन निभाने का है। केजरीवाल की नजरों में आतिशी पार्टी के अन्य नेताओं की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद या लॉयल हैं। आप आतिशी की विनम्रता को देखिए। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले बयान में कहा कि दिल्ली में एक ही सीएम हैं जिनका नाम अरविंद केजरीवाल है। क्या यह आतिशी की चमचागिरी नहीं हैं?'

पड़ोसी ने कहा, ‘उन्होंने दिल्ली की ज्वलंत समस्याएं प्राथमिकता से हल करने के बारे में कुछ भी नहीं कहा। जनहित की बात करने की बजाय उन्होंने अपने आका केजरीवाल के प्रति निष्ठा जताई। दिल्ली में प्रदूषण बढ़ा है और जलसंकट व्याप्त है। पिछले दिनों भारी बारिश की वजह से दिल्ली की सड़कों पर पानी भर गया था। आतिशी ने आत्मसम्मान या खुद्दारी का परिचय न देते हुए अपने बयान में खुद को केजरीवाल की चम्मच या मोहरा बताया।’

हमने कहा, ‘आतिशी के बयान को गंभीरता से मत लीजिए। एक बार कुर्सी मिल जाने के बाद दिमाग पर सत्ता का नशा सवार हो जाता है तो कोई उसे छोड़ना नहीं चाहता। मध्यप्रदेश में उमा भारती ने सीएम पद से इस्तीफा देकर 80 वर्षीय बाबूलाल गौर को इस उम्मीद के साथ मुख्यमंत्री बनवाया था ताकि जब वह हुबली में झंडा सत्याग्रह करने के बाद वापस भोपाल लौटें तो गौर उन्हें उनकी कुर्सी लौटा दें।ट

हमने कहा, ‘बाबूलाल गौर ने उमा भारती को ठेंगा दिखा दिया। झारखंड में भी चंपई सोरेन की इच्छा हेमंत सोरेन को कुर्सी लौटाने की नहीं थी लेकिन हेमंत ने चंपई को करारा झटका देकर सीएम पद वापस पा लिया। राजनीति का दूसरा नाम मौक्कापरस्ती या अवसरवाद है। हमें ऐसा नहीं लगता कि आतिशी अपनी कुर्सी कभी छोड़ेंगी। विश्वासपात्र को विश्वासघाती बनते देर नहीं लगती।’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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