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Navabharat Nishanebaaz: प्रमोशन लेने से किया इनकार,  कांस्टेबल को अपने पद से प्यार

Sub Inspector Demotion: दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने खुद डिमोशन की मांग कर फिर से कांस्टेबल बनने का अनुरोध किया, जिसे प्रशासन ने स्वीकार कर लिया। मामला चर्चा में है।

अंकिता पटेल

Unusual Police Promotion Request: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, दिल्ली में मनीष नामक सब इन्स्पेक्टर ने मांग की कि उसका प्रमोशन रद्द कर उसे फिर से पहले की तरह कांस्टेबल बना दिया जाए। उत्तर-पूर्व जिला पुलिस प्रशासन ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और डिमोशन कर उसे फिर से कांस्टेचल बना दिया। यह कितना अजीब मामला है।'

हमने कहा, 'कहावत है नीम के कीड़े को नीम ही मीठी लगती है। मनीष कांस्टेबल के रूप में अपनी यथास्थिति से संतुष्ट था। अपनी काबिलियत साबित करने के लिए उसने पुलिस की डिपार्टमेंटल परीक्षा दी। उसमें उत्तीर्ण होने पर उसे सब इन्स्पेक्टर के रूप में पदोन्नति दी गई लेकिन उसकी अंतरात्मा ने कहा कि बेटा क्या रखा है प्रमोशन में। फिर से सिपाही बन जा। अपनी पुरानी बीट संभाल ले जहां तेरा लोगों से संपर्क या आपसी हित-संबंध बना हुआ है।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, यह भी हो सकता है कि वह कांस्टेबल निस्वार्थ और त्यागी होगा। उसे लगा होगा कि क्या प्रमोशन और क्या डिमोशन। यह सब दुनिया की मोह-माया है। इसलिए वह 'जाही विधि राखे राम ताही विधि रहिए' का भजन करते हुए कांस्टेबल बने रहने को ही तैयार है। पदोन्नति का प्रलोभन उसने ठुकरा दिया। वह सिपाही नहीं संत होगा!'

हमने कहा, 'लोग तो उसे बेवकूफ मान रहे होंगे जिसने आती लक्ष्मी को ठुकरा दिया। प्रमोशन बड़ी किस्मत से मिलता है लेकिन अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारते हुए उसने यह सुअवसर खो दिया। उसने सुमति की बजाय कुमति दिखाई। उसकी पत्नी और बच्चे कितने निराश हुए होंगे।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, यह मत समझिए कि उस पुलिसकर्मी की अक्ल पर पत्थर पड़ गए। एक पुरानी कथा है कि एक चूहा हमेशा बिल्ली से भयभीत रहा करता था। एक साधु-महात्मा ने उससे कहा कि डरने की जरूरत नहीं। मैं तुझे जो चाहे बना सकता हूं। चूहे ने कहा कि मुझे बिल्ली बना दी। बिल्ली बन जाने पर वह कुत्ते से डरने लगा। उसे कुत्ता बनाने पर वह शेर से डरा तो महात्मा ने उसे शेर बना दिया। फिर वह बादलों की गर्जना से डरा तो महात्मा ने उसे बादल बनाया, बादल का घमंड पर्वत से टकराने पर चूर-चूर हो गया तो उसके कहने पर उसे पहाड़ बनाया गया। पहाड़ चनने के बाद उसे समझ में आया कि पहाड़ में चूहा भी छेद कर सकता है तो उसकी प्रार्थना पर महात्मा ने उसे फिर से चूहा बना दिया। कांस्टेबल का भी ऐसा ही किस्सा है।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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