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नवभारत विशेष

निशानेबाज: फिल्म से राजनीति तक रेखा दिल्ली ने वादाखिलाफी को देखा

Delhi CM Rekha Gupta: बीजेपी ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में वादे किए थे जो अधूरे पड़े हैं। अभी तक न तो महिलाओं को 2,500 रुपए मासिक की पेंशन मिली है, न ही बुजुर्गों की पेंशन शुरू हुई है।

दीपिका पाल

नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, रेखा गणित या ज्यामेट्री के बारे में आपकी क्या राय है?’ हमने कहा, ‘रेखा कहां नहीं है! फिल्म से लेकर राजनीति तक आपको रेखा मिल जाएंगी। 75 साल की रेखा आज भी युवा नजर आती हैं। उनकी अमिताभ बच्चन के साथ फिल्मी जोड़ी लोगों ने मि। नटवरलाल, खून-पसीना, मुकद्दर का सिकंदर जैसी कितनी ही मूवीज में देखी थी। रेखा गणित में 3 रेखा मिलने से त्रिकोण बनता है। फिल्म ‘सिलसिला’ में अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और रेखा का प्रेम त्रिकोण था। एक तरफ पत्नी थी तो दूसरी तरफ प्रेमिका! रेखा कांजीवरम साड़ी पहनती हैं और मांग में सिंदूर भरती हैं। फिल्म उमराव जान में रेखा ने लाजवाब अभिनय किया था।’

पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, फिल्मों में बिंदु खलनायिका रही हैं और रेखा नायिका। कहते हैं कि जब कई बिंदु मिल जाते हैं तो रेखा बन जाती है। फिल्मों में प्रेम है तो रेखा गणित में प्रमेय! यदि राजनीति की चर्चा करें तो दिल्ली में बीजेपी की रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री हैं। वहां का हर पार्टी कार्यकर्ता उनकी प्रशंसा करते हुए गा सकता है- रेखा ओ रेखा, मैंने तुझे देखा!’ हमने कहा, ‘रेखा गुप्ता का ज्यादा गुणगान मत कीजिए। उनकी पार्टी ने दिल्लीवासियों से वादाखिलाफी की है।

बीजेपी ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में वादे किए थे जो अधूरे पड़े हैं। अभी तक न तो महिलाओं को 2,500 रुपए मासिक की पेंशन मिली है, न ही बुजुर्गों की पेंशन शुरू हुई है। न महिलाओं का पिंक कार्ड बना है, न होली-दिवाली पर 500 रुपए में गैस सिलेंडर मिले हैं। न स्कूल फीस पर लगाम लगी है और न प्रदूषण पर नियंत्रण लगा है। बसों का संकट और जलसंकट बढ़ा है। रेखा गुप्ता अब तक खुद को सफल और सक्षम मुख्यमंत्री साबित नहीं कर पाईं।’

पड़ोसी ने कहा,‘निशानेबाज, लगता है आप केजरीवाल सरकार के शराब घोटाले को भूल गए। उनकी मोहल्ला क्लीनिक योजना में डाक्टर के दर्शन दुर्लभ थे। केजरीवाल काम कम करते थे, दिखावा ज्यादा करते थे। रेखा गुप्ता समय के साथ अपनी उपयोगिता साबित कर देंगी। रेखा सरल होती है तो कभी टेढ़ी-मेढ़ी या वक्र भी होती है। उम्मीद कीजिए कि वह दिल्ली के भाग्य चक्र को सुधार देंगी।’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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