BJP Congress Political Debate: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, बीजेपी कितनी अनुशासित पार्टी है। वहां नेतृत्व प का निर्देश सभी आंख मूंदकर मानते हैं। कहीं कोई मतभेद या बहस नहीं! सारे भक्त श्रद्धाभाव से नमो नमो जपते हैं।
गोदी मीडिया आरती उतारने में लगा रहता है। पार्टी का अनुशासन इतना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कह दिया कि अब से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन मेरे बॉस हैं। कांग्रेस को इससे कुछ सीखना चाहिए।'
हमने कहा, 'कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र और स्वतंत्र अभिव्यक्ति है। राज्यों में उसके जुझारू नेताओं की आपस में खटपट चलती रहती है। कांग्रेस के नेताओं के सुर और ताल में विविधता की झलक है जबकि बीजेपी का एक ही अंऑर्केस्ट्रा है, जिसे पार्टी के सभी लोग आंख मूंदकर सुनते हैं। आपने फिल्म राम-लखन का गीत सुना होगा- ए-जी, ओ जी, लो जी, सुनो जी, करता हूं मैं वो तुम भी करो जी, वन टू का फोर, फोर टू का वन, माई नेम इस लखन ! यही स्थिति जीडीपी की दर को लेकर है।
सरकार इसे 7.8 फीसदी बताती है जबकि आलोचक अपने अनुमान से इसे 2.6 प्रतिशत बताते हैं। हकीकत यह है कि देश पर 200 लाख करोड़ रुपये कर्ज का बोझ है। देशवासियों को विदेश यात्रा नहीं करने और सोना नहीं खरीदने का हितोपदेश दिया जा रहा है। मीडिया की आजादी की यह हालत है कि 180 देशों की सूची में भारत 159 वें स्थान पर है। पेट्रोल इथेनॉल मिलाने के बाद भी काफी ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है। महंगाई की मार से घरों का बजट चौपट हो चुका है। युवा बेरोजगारी चरम पर है। शिक्षा व्यवस्था को पेपरलीक के अजगर ने जकड़ लिया है।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, इस तरह की फालतू बातें उनको सूझती हैं जो दिमागी नक्सल हैं। आप इस बात से फूलकर कुप्पा हो जाइए कि ईरान युद्ध तथा रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद देश की जीडीपी ग्रोथ 7।8 प्रतिशत है। यह कितना बड़ा जादू है। इतना याद रखिए कि बाज की नजर, चीते की चाल, बाजीराव की तलवार और मोदी के मन की बात पर संशय नहीं किया करते।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी खुद को सीएम पद का चेहरा बताते हैं लेकिन प्रताप सिंह बाजवा सामूहिक नेतृत्व के पक्ष में हैं। उत्तराखंड के कांग्रेस नेताओं में भी वर्चस्व की लड़ाई है। गुजरात में जिग्नेश मेवाणी और किरीट पटेल में प्रतिस्पर्धा है। गोवा के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित पाटकर ने थर्ड फ्रंट बना लिया है। यूपी में कांग्रेस का एक गुट सपा से तो दूसरा बसपा से गठबंधन की बात करता है।' हमने कहा, 'यही तो कांग्रेस की वैचारिक स्वतंत्रता है। आगे क्या करना है, राहुल देखेंगे।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा