नवभारत विशेष

चुनाव के पहले CAA लागू करने का एलान, एजेंडा शीघ्र लागू करने पर आमादा BJP

चंद्रमोहन द्विवेदी

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) से ठीक पहले बीजेपी (BJP) ने एक बार फिर सीएए का दांव चल दिया है जो इस पार्टी के लिए संजीवनी साबित हो सकता है. लोकसभा सीटों के लिहाज से यूपी (80), महाराष्ट्र (48) के बाद बंगाल (42) ही तीसरा सबसे बड़ा राज्य है. अपना घोषित एजेंडा लागू करने की दिशा में बीजेपी तत्परता दिखा रही है.

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देनेवाले अनुच्छेद 370 को समाप्त करने, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब वह संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) लागू करने पर भी आमादा है. उसे ऐसा करने में कोई अवरोध या बाधा भी नहीं है. अपने बहुमत के बल पर केंद्र की बीजेपी नेतृत्ववाली एनडीए सरकार जो चाहे कर सकती है. इसीलिए केंद्रीय जहाजरानी राज्यमंत्री शांतनु ठाकुर ने दावा किया कि केवल बंगाल ही नहीं देश भर में एक सप्ताह के भीतर सीएए लागू कर दिया जाएगा. उन्होंने इसे अपनी गारंटी बताया. 

दिसंबर 2019 में सीएए बिल लोकसभा और राज्यसभा में पारित होने के बाद 10 जनवरी 2020 को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी तब देश भर में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे और दिल्ली के शाहीनबाग समेत कुछ इलाकों में कई महीनों तक धरना दिया गया था. इसके बाद से गृह मंत्रालय नियम बनाने के लिए संसदीय समितियों से नियमित अंतराल में एक्सटेंशन लेता रहा. हाल ही में पता चला कि सीएए के नियम तैयार हैं और लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही इसे अधिसूचित किया जाएगा. उल्लेखनीय है कि गृहमंत्री अमित शाह ने गत 27 दिसंबर को कोलकाता में कहा था कि सीएए लागू करने से सरकार को कोई नहीं रोक सकता.

किसे फायदा होगा

सीएए का उद्देश्य 31 दिसंबर 2014 के पहले भारत में बसे बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाइयों सहित प्रताड़ना झेल चुके गैरमुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है. इन विस्थापित लोगों को नागरिकता लेने के लिए कोई दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी. सीएए लागू होने से सबसे ज्यादा फायदा मतुआ समाज के हिंदू शरणार्थियों को होगा. 1950 के दशक में यह समुदाय तत्कालीन पूर्व पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भाग कर बंगाल आ गया था. मतुआ समुदाय अपनी उल्लेखनीय आबादी तथा किसी पार्टी को एक साथ मतदान करने की प्रवृत्ति के कारण अहम वोट बैंक माना जाता है.

बंगाल की अनुसूचित जनजाति की आबादी में मतुआ समुदाय एक बड़ा हिस्सा है. बीजेपी मानती है कि भारतीय नागरिकता प्रदान करने से मतुआ समुदाय के वोटों का लाभ उसे मिलेगा. केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर मतुआ समुदाय की बहुलता वाले बनगांव से बीजेपी के सांसद हैं. 90 के दशक से बंगाल की राजनीतिक पार्टियों में मतुआ समुदाय के वोट हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा चलती रही है. किसी एक पार्टी को यह समुदाय अपने पूरे वोट दे देता है.

शांतनु ठाकुर ने कहा कि जब बंगाल की राज्य सरकार दावा करती है कि मतुआ समुदाय के सभी नागरिकों के पास वोटर आईडी और आधार कार्ड है तो उन्हें वोट देने से क्यों वंचित रखा गया? इसका जवाब मुख्यमंत्री को देना होगा. सीएए लागू करने से उसका लाभ अगली पीढि़यों को भी होगा. 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में मतुआ समाज पर पकड़ बनाकर बीजेपी ने सीटे जीती थीं. 2014 के चुनाव में बंगाल में बीजेपी की सिर्फ 2 लोकसभा सीटें थी जो 2019 में बढ़कर 18 हो गई थी.

बड़ा चुनावी मुद्दा रहा

पिछले लोकसभा चुनाव में सीएए लागू करने का वादा बीजेपी के लिए बड़ा चुनावी मुद्दा था. पार्टी मानती है कि सीएए हिंदू राष्ट्रवाद के उसके एजेंडे को आगे बढ़ा सकता है और हिंदू मतदाताओं को उसकी ओर आकर्षित कर सकता है. बीजेपी सीएए को देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कदम के रूप में पेश कर रही है. विपक्ष का आरोप है कि सीएए मुस्लिम विरोधी है. सीएए लागू होने से इसका प्रभाव बंगाल सहित पूर्वोत्तर के राज्यों में होगा जहां बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अत्याचारों से परेशान होकर हिंदू बड़ी संख्या में भागकर आए. असम में ही 20 लाख से ज्यादा हिंदू बांग्लादेशी रहते हैं. नागरिकता मिलने पर उन्हें भारतीय नागरिकों के समान लाभ मिलेंगे.

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