JDU TDP LJP UCC Stand: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोचा भी न होगा कि एनडीए की 3 सहयोगी पार्टियां यूसीसी (यूनिफार्म सिविल कोड) के मुद्दे पर उन्हें अंगूठा दिखा देंगी। शाह उनसे यह भी नहीं कह सकते हमारी बिल्ली, हमीं से म्याऊं ! वह तो मानकर चल रहे थे कि एनडीए की पार्टियां पूरी तरह बीजेपी की जेब में समा गई हैं और उनकी किसी घोषणा पर चूं-चपड़ नहीं करेंगी।
उनसे कहा जाएगा- उठ तो उठ, बैठ तो बैठ ! एनडीए को अपने इशारे पर नचाने में अमित शाह फेल हो गए। जदयू, टीडीपी और लोजपा (रामविलास) ने कहा कि 2029 तक देश के 21 एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिकता कानून अथवा यूसीसी लागू करने के बारे में उनसे कोई राय नहीं ली गई। किसी भी तरह की चर्चा नहीं हुई। इस मुद्दे पर जब जरूरी होगा, तब देखा जाएगा।'
हमने कहा, 'बीजेपी नेताओं का मिजाज ही ऐसा है। उन्हें लगता है कि उनका निर्णय या हुक्म एनडीए को आंख मूंदकर मानना होगा जबकि मोदी सरकार नीतीशकुमार, चंद्राबाबू नायडू की पार्टियों के सहयोग पर टिकी हुई है। बीजेपी की लोकसभा में सिर्फ 240 सीटें हैं। एनडीए ने उन्हें 272 के बहुमत तक पहुंचाया। यूसीसी का मुद्दा बीजेपी के लिए ठीक है लेकिन बिहार और आंध्र प्रदेश में जदयू और टीडीपी अपने मुस्लिम वोटों को नाराज नहीं कर सकते इसलिए वह अमित शाह की घोषणा से सहमति नहीं रखते।'
पड़ोसी ने कहा, 'गठबंधन की राजनीति ऐसी ही होती है। वहां हर समय समान राय नहीं बन पाती। जब अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार थी तो उसमें 24 छोटी-बड़ी पार्टियां शामिल थीं। इस वजह से बीजेपी अपना एजेंडा लागू नहीं कर पाती थी। 2024 के आम चुनाव में 'अबकी बार 400 पार' का उसका नारा खोखला साबित हुआ।
पार्टी 240 सीटों से आगे नहीं पढ़ पाई। खुद की मेजॉरिटी हो तो बीजेपी कुछ भी कर सकती है। अभी तो एनडीए की सहयोगी पार्टियों की मर्जी संभालनी होगी और सतर्कता से आगे बढ़ना होगा। ऐसा नहीं चलेगा कि राजा बोले हाथी डोले !'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा