छठ पूजा के विधिवत समापन से ही मिलेगी छठी मैया की कृपा, 
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छठ पूजा के विधिवत समापन से ही मिलेगी छठी मैया की कृपा, जानिए कैसे करें व्रत का पारण

जो भी व्यक्ति छठ पूजा का व्रत रखता है उसे सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। छठ पूजा की शुरुआत 5 नवंबर को नहाय खाय से हुई थी अब इसका समापन 8 नवंबर 2024 ऊषाकाल सूर्य की उपासना के बाद होगा।

सीमा कुमारी

Chhath Puja 2024:सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्यौहार मुख्यतः सूर्य देव को समर्पित है। इस वर्ष छठ पूजा की शुरुआत 5 नवंबर, मंगलवार से हो चुकी है जिसका समापन 8 नवंबर 2024- उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर किया जाएगा। छठ पूजा में सूर्य की उपासना का बड़ा महत्व है। इसके बिना छठ पूजा अधूरा माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि, जो भी व्यक्ति छठ पूजा का व्रत रखता है उसे सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। छठ पूजा की शुरुआत 5 नवंबर को नहाय खाय से हुई थी अब इसका समापन 8 नवंबर 2024 ऊषाकाल सूर्य की उपासना के बाद होगा। आइए जानते हैं छठ पूजा का व्रत पारण कैसे किया जाता है, क्या है विधि, मुहूर्त-

जानिए छठ पूजा 2024 व्रत पारण

8 नवंबर 2024 को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 38 मिनट पर होगा। इस दौरान व्रती सूर्य को अर्घ्य दें और उसके बाद ही व्रत खोलें।

छठ व्रत पारण की विधि

छठ का व्रत खोलते वक्त सबसे पहले पूजा में चढ़ाया प्रसाद जैसे ठेकुआ, मिठाई, ग्रहण करें। फिर कच्चा दूध पीएं। कहते हैं भोग खाने के बाद ही व्रत पूरा माना जाता है। व्रत पारण करने से पहले बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और छठी माता को अर्पित किया गया प्रसाद सभी को बांटना चाहिए।

छठ पूजा का व्रत खोलते समय ध्यान रखें कि आपको मसालेदार भोजन नहीं करना है। छठ व्रत के प्रभाव से जीवन में सुख-संपत्ति, सौभाग्य में वृद्धि होगी। छठ पूजा में व्रत का फल तभी मिलता है जब व्रत का पारण सही विधि से किया जाए।

क्या है छठ व्रत की महिमा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के समय यह व्रत द्रौपदी ने किया था। ऐसा उल्लेख मिलता है कि जब पांडव चौसर में अपनी धन-संपत्ति और राज पाठ दांव पर लगाकर हार गए थे तो इसी व्रत के प्रभाव से द्रौपदी ने राजपाठ पुन: प्राप्त किया था।

इसके अलावा यह भी मान्यता है कि कुंती ने पुत्र प्राप्ति के लिए छठ व्रत किया था और भगवान सूर्य ने प्रसन्न होकर उनकी यह मनोकामना पूर्ण की थी। इस पुत्र का नाम कर्ण रखा, जो हर रोज पानी में खड़े होकर सूर्य देव की आराधना करते थे और छठ व्रत रखकर सूर्य देव को प्रसन्न किया था।

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