Yogini Ekadashi Deepak: भगवान विष्णु की आराधना के लिए एकादशी तिथि को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। आषाढ़ मास में आने वाली योगिनी एकादशी का महत्व विशेष रूप से बताया गया है। इस वर्ष यह पावन व्रत शुभ संयोग में मनाया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से सुख, समृद्धि, धन-धान्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा भी बेहद शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इससे रुके हुए कार्यों में गति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, योगिनी एकादशी की संध्या के समय भगवान विष्णु के सामने शुद्ध घी का दीपक अवश्य जलाना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, अटके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
योगिनी एकादशी पर तुलसी के पौधे के पास भी घी या तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह उपाय घर के वातावरण को पवित्र बनाता है, सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है और आर्थिक उन्नति तथा पारिवारिक सुख का मार्ग प्रशस्त करता है।
योगिनी एकादशी की रात घर के मुख्य द्वार पर एक दीपक जलाने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं करती और शुभता, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है। इसे घर की रक्षा और मंगल का प्रतीक भी माना जाता है।
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ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और जीवन की अनेक बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
ध्यान दें: ऊपर बताए गए दीपक जलाने के उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।