आखिर मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? (सौ.सोशल मीडिया) 
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मकर संक्रांति मनाने की असली वजह आई सामने, जानिए इसका इतिहास, धार्मिक और वैज्ञानिक बातें भी

Makar Sankranti 2026: आखिर मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है? जानिए सूर्य के उत्तरायण होने से जुड़ा इसका धार्मिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व, जो इस पर्व को खास बनाता है।

सीमा कुमारी

Scientific Significance of Makar Sankranti: मकर संक्रांति हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पर्व सूर्य देव, प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन को दर्शाता है। भारत के अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।

उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति, गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल और असम में माघ बिहू कहा जाता है। नाम चाहे अलग हों, लेकिन इस त्योहार का अर्थ एक ही है सूर्य देव की पूजा करना और दान-पुण्य करना।

लेकिन, ज्यादातर लोग मकर संक्रांति से जुड़ी हुई बहुत सारी विशेष बातों के बारे में नहीं जानते है। जबकि वह प्रत्येक वर्ष यह त्योहार मनाया करते हैं। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मकर संक्रांत के त्यौहार और उसके महत्व के बारे में बताएंगे साथ ही साथ हम त्यौहार के धार्मिक और वैज्ञानिक कारणों पर भी चर्चा करेंगे जिनके कारण यह त्यौहार मनाया जाता है।

आखिर मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?

सनातन धर्म में मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि, इस दिन से सूर्य उत्तर दिशा (उत्तरायण) की ओर बढ़ने लगते हैं। उत्तरायण को शुभ समय माना गया है। इस कारण मकर संक्रांति को नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

मकर संक्रांति का इतिहास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने मकर राशि में आते हैं, इसलिए यह दिन पारिवारिक प्रेम और मेल-मिलाप का भी संकेत देता है। एक अन्य कथा के अनुसार, भीष्म पितामह ने उत्तरायण के समय ही देह त्याग किया था, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ गया।

मकर संक्रांति का क्या है धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व है। यह पर्व उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है, जब सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होते हैं। उत्तरायण को आध्यात्मिक उन्नति का काल माना गया है। इस समय किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल शीघ्र प्राप्त होता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती अथवा किसी भी पवित्र जल स्रोत में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का क्षय होता है। साथ ही ब्राह्मणों, साधुओं और दीन-दुःखी, निर्धन, जरूरतमंद लोगों को दान देने से भगवान सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व

मकर संक्रांति का त्योहार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। मकर संक्रांति से सूर्य दक्षिणासनय से उत्तरायण की ओर बढ़ता है। इसका वैज्ञानिक कारण है। सूर्य धीरे धीरे उत्तरी गोलार्ध की ओर झुकता है, जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।

मकर संक्रांति से शीत ऋतु का अंत और वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। यह समय कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि फसल कटाई का मौसम शुरू होता है।

सूर्य की किरणों में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में मिलता है। इस समय सूर्य की किरणें स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी मानी जाती हैं।

मकर संक्रांति पर सूर्य की स्थिति भूमध्य रेखा से मकर रेखा की ओर होती है। यह दिन खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह साल का पहला सोलर ट्रांजिट या सूर्य का राशि परिवर्तन होता है।

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