कन्या पूजन (सौ. Gemini) 
धर्म

कन्या पूजन में लंगूर को बुलाना क्यों माना जाता है जरूरी? जानिए इस परंपरा के पीछे की मुख्य वजह

Langur In Kanya Pujan: कन्या पूजन के दौरान लंगूर (बालक) को बुलाने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि यह भगवान भैरव का प्रतीक होता है, जो मां दुर्गा के रक्षक बताया गया है।

सीमा कुमारी

Kanya Pujan Importance:आज 26 मार्च 2026 को चैत्र का आठवां दिन यानी दुर्गा अष्टमी है। मां महागौरी की पूजा के साथ कन्या पूजन भी होगा। कन्या पूजन के समय 02 से 10 साल की कन्याओं को आमंत्रित कर उनको हलवा, पूरी और चने का भोग खिलाया जाता है अंत में उनको कुछ राशि यानी पैसे देकर और पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है।

धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, बिना कन्या पूजन नवरात्रि की पूजा और व्रत सफल नहीं होता। कन्या पूजन की प्रक्रिया नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि के दिन किया जाता है। कन्या पूजन के समय एक लांगूर को भी बुलाया जाता है। उसको भी भोजन खिलाया जाता है।

कन्या पूजन में लांगूर का क्या महत्व है?

धार्मिक लोक मत के अनुसार, कन्‍या पूजन में केवल लड़कियों को ही नहीं, बल्कि एक छोटे लड़के को भी बुलाना जरूरी होता है, जिसे लांगूर या बटुक कहा जाता है। जैसे कन्‍याएं देवी दुर्गा का रूप होती हैं, वैसे ही यह बालक भैरवनाथ का प्रतीक माना जाता है। इस छोटे लड़के को भोजन कराना और पूजन में शामिल करना पूजा की पूर्णता के लिए आवश्यक है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव ने माता दुर्गा की रक्षा के लिए भैरव का रूप धारण किया, तो माता दुर्गा ने वरदान दिया कि जो भी भक्त मेरी पूजा करेगा, उसे भैरव की भी पूजा करनी होगी। तभी पूजा पूर्ण मानी जाएगी। इसी परंपरा के अनुसार कन्‍या पूजन में लड़के को भैरव का रूप मानकर पूजा में शामिल किया जाता है।

भैरव पूजा से बढ़ती है सुख-समृद्धि

धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, भैरव बाबा को शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करने वाला देवता माना जाता है। कन्‍या पूजन में बटुक या लांगूर बुलाकर उनकी पूजा और भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि आती है और घर की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। कई प्रसिद्ध देवी-धामों में भी भैरव का मंदिर होता है, जैसे वैष्णो देवी में, जहां भैरव बाबा के दर्शन किए बिना माता के दर्शन पूरे नहीं माने जाते।

कन्या पूजन के लिए बटुक न मिले तो क्या करें

बताया जाता है कि, अगर आपको कन्या पूजन के लिए कोई बटुक न मिले तो फिर आप एक थाली भैरव बाबा के नाम की निकाल दीजिए। फिर इस भोग को कुत्ते को खिला सकते है। आपको बता दें कि कुत्ता भैरवनाथ की सवारी माना जाता है।

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