Dahi Handi Mein 9 Ka Mahatva : आज 5 सितंबर 2026 को पूरे देशभर में दही हांडी उत्सव मनाया जा रहा है। दही हांडी उत्सव हर साल जन्माष्टमी के अगले दिन मनाई है। खासतौर पर, मुंबई में इसकी धूम अलग ही देखने को मिलती है। इसमें एक मटकी को रस्सी की मदद से ऊंचाई पर लटकाया जाता है। मटकी में दही, मक्खन, मिश्री और प्रसाद रखा जाता है।
लेकिन क्या आप जानते है कि दही हांडी में 9 की संख्या इतनी खास क्यों मानी जाती है? आधुनिक दही हांडी प्रतियोगिताओं में 9-स्तरीय मानव पिरामिड को बेहद चुनौतीपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। वहीं धार्मिक परंपरा में भी 9 अंक को विशेष महत्व दिया गया है। दही हांडी और 9 की संख्या के बीच क्या संबंध है। यहां जानिए
दही हांडी उत्सव में 9 की संख्या का कोई कड़ा धार्मिक रहस्य नहीं है, बल्कि यह मानव पिरामिड की ऊंचाई और ऐतिहासिक रिकॉर्ड से जुड़ी एक साहसिक चुनौती है। दही हांडी में प्रतियोगिताओं में 9 स्तरों का पिरामिड बनाना बेहद कठिन माना जाता है।
पिरामिड के सबसे ऊपर एक छोटा और हल्का गोविंदा चढ़ता है, जिसे अक्सर बाल कृष्ण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वह ऊपर पहुंचकर मटकी फोड़ता है। यही वजह है कि 9-स्तरीय पिरामिड को दही हांडी प्रतियोगिताओं में एक बड़ी उपलब्धि और अंतिम चुनौती के रूप में देखा जाता है।
मानव पिरामिड में सबसे ऊपर छोटे गोविंदा यानी बच्चे को चढ़ाने का मुख्य कारण मानव पिरामिड को संतुलन और सुरक्षा से जुड़ा बताया जाता है। धार्मिक प्रतीक के रूप में सबसे ऊपर बच्चे को बाल गोपाल या बाल कृष्ण से जोड़ा जाता है। सबसे ऊपर पहुंचने के बाद वह मटकी को फोड़ता है और नीचे खड़े गोविंदाओं की पूरी टीम उत्सव मनाती है।
सनातन धर्म परंपरा में 9 अंक को शुभ माना जाता है। 9 अंकों से नवरात्रि के 9 दिन, नवदुर्गा और नवग्रह का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, दही हांडी में 9वें स्तर पर ही बच्चे को चढ़ाने की परंपरा के पीछे कोई सर्वमान्य शास्त्रीय प्रमाण नहीं मिलता।
मानव पिरामिड में सबसे ऊपर छोटे और हल्के सदस्य को रखने का मुख्य कारण संतुलन और सुरक्षा से जुड़ा है। हालांकि दही हांडी में 9 स्तर रखने का कोई एक सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है। यह संख्या आधुनिक प्रतियोगिताओं और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में अधिक प्रमुख दिखाई देती है।