Dahi Handi 2026: जन्माष्टमी के बाद क्यों फोड़ी जाती है दही की मटकी? जानें 5 या 6 सितंबर, कब है दही हांडी

Dahi Handi: श्रीकृष्‍ण जन्माष्टमी के अगले दिन हांडी उत्सव मनाया जाता है। खासकर मुंबई, मथुरा, वृंदावन आदि जगहों पर धूमधाम से मनाया है। जानिए आखिर क्यों मनाते दही हांडी का पर्व?
Dahi Handi Kab Hai 2026
कब है दही हांडी (सौ.AI)
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Dahi Handi Kab Hai 2026 : आज देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। हर तरफ भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का माहौल है। मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और झांकियों का आयोजन किया जा रहा है। जैसा कि जानते है कि श्रीकृष्‍ण जन्माष्टमी के अगले दिन हांडी उत्सव मनाया जाता है। खासकर मुंबई, मथुरा, वृंदावन आदि जगहों पर। इस साल दही हांडी 5 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। जानिए आखिर क्यों मनाते दही हांडी का पर्व?

भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा दही हांडी उत्सव

जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाने वाला दही हांडी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा है। भगवान श्रीकृष्ण को माखन और दही खाना बहुत पसंद था। बचपन में वे अपने सखाओं के साथ मिलकर गोकुल की गलियों में घूमते थे। जब उन्हें किसी घर में माखन-दही की मटकी दिखाई देती, तो वे मौका देखकर उसे चुरा लेते थे।

उनकी इन शरारत से गोपियां हमेशा परेशान रहती थीं। कहा तो ये भी जाता है कि, गोपियों ने कान्हा से माखन बचाने के लिए मटकी को जमीन से काफी ऊंचाई पर लटकाना शुरू कर दिया लेकिन नटखट कान्हा कहां मानने वाले थे।

वे अपने दोस्तों को इकट्ठा करते और सभी मिलकर एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर मानव पिरामिड बनाते। सबसे ऊपर पहुंचने वाला साथी मटकी को फोड़ देता और फिर सभी मिलकर माखन-दही का आनंद लेते।

अखिर यह पर्व जन्माष्टमी के दूसरे दिन क्यों मनाते हैं?

दही हांडी का उत्सव जन्माष्टमी के दूसरे दिन मनाए जाने की मुख्य वजह यह है कि जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है, जबकि दूसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को याद करने की परंपरा है।

माखन और दही से जुड़ी कान्हा की शरारतें उनकी सबसे लोकप्रिय बाल लीलाओं में आधारित हैं। मान्यता है कि बाल कृष्ण को माखन और दही बेहद प्रिय था और वे इन्हें पाने के लिए अपने सखाओं के साथ मटकी फोड़ते थे। इसी बाल लीला की याद में जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी उत्सव मनाने की परंपरा है।

सामूहिक एकता और भाईचारे का प्रतीक

दही हांडी सिर्फ मटकी फोड़ने का उत्सव नहीं है। यह मिल-जुलकर लक्ष्य हासिल करने, एक-दूसरे पर भरोसा रखने और सहयोग करने की सीख देता है। मानव पिरामिड में सबसे ऊपर पहुंचने वाला गोविंदा तभी सफल होता है, जब पूरी टीम मजबूती से उसका साथ देती है। यही संदेश दही हांडी को आज भी खास और लोकप्रिय बनाता है।

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