Rakhi After Raksha Bandhan: हिन्दू धर्म में भाई-बहन से जुड़े कई पर्व मनाए जाते है। जिनमें प्रमुख रूप से रक्षाबंधन, भाई दूज, यम द्वितीया और भाई तीज आदि। इन पर्वों पर एक खास पर्व रक्षा पंचमी भी है। जो कि आज यानी 1 सितंबर मंगलवार को रक्षा पंचमी मनाई जा रही है। यह पर्व ओडिशा में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसे रेखा पंचमी या शांति पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।
रक्षा पंचमी का पर्व हर साल रक्षाबंधन के 5 दिन बाद मनाई जाती है। इस वजह से इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। इस साल कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 1 सितंबर की सुबह करीब 7:42 बजे से शुरू होकर 2 सितंबर की सुबह तक रहेगी। इसी कारण इस बार रक्षा पंचमी 1 सितंबर को मनाई जा रही है।
अगर किसी वजह से रक्षाबंधन के दिन भाई को राखी नहीं बांध पाई हैं, तो इस दिन अपने भाई को राखी बांध सकते है। इस दिन भाई को कलाई में राखी यानी रक्षासूत्र बांधकर उनकी मंगलकामना कर सकते है।
इस अवसर पर आप सुबह स्नान करके भगवान शिव, बटुक भैरव और गणेश जी की पूजा करने का विधान है। घर में सुख-शांति और परिवार की सुरक्षा की कामना से दीपक जलाया जा सकता है। श्रद्धा के अनुसार भगवान को फल, फूल और प्रसाद अर्पित करें।
रक्षा पंचमी के दिन किसी के साथ बेवजह विवाद या बहस करने से बचें। इस दिन शांत मन से पूजा-पाठ करना और परिवार के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करना शुभ माना जाता है। इसलिए अनावश्यक क्रोध, वाद-विवाद और नकारात्मक बातचीत से दूर रहना बेहतर होता है।
रक्षा पंचमी का पर्व बड़ा महत्व रखता है। जहां उतर भारत में रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प से जुड़ा हुआ है। वही रक्षा पंचमी का पर्व भाई की सुरक्षा और संकटों से बचाव की कामना से जुड़ा हुआ है। कुछ परंपराओं में इसे रेखा पंचमी या राख्य पंचमी भी कहा जाता है। खासतौर पर पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में इस दिन का विशेष महत्व है।
इसे रेखा पंचमी या शांति पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। प्रत्येक वर्ष रक्षा पंचमी का यह त्योहार रक्षाबंधन के बाद ठीक पांचवें दिन मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि जो लोग किसी कारणवश रक्षाबंधन के दिन अपनी कलाई पर रक्षासूत्र बंधवाने में असमर्थ रहे हों या अपनी बहन से राखी नहीं बंधवा पाए हों, वे लोग आज रक्षा पंचमी के दिन रक्षासूत्र या राखी बंधवा सकते हैं।