आसन पर बैठना क्यों जरूरी माना जाता है (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

आसन पर बैठकर पूजा करने के क्या है धार्मिक और वैज्ञानिक कारण जानिए

Important Tips for Puja: कई बार लोग बिना आसन के ही पूजा करने लगते है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है?

सीमा कुमारी

Puja Path Niyam:धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृस्टि से पूजा-पाठ का बड़ा महत्व होता है। ऐसे में हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ के कई नियम बताए गए है। इन नियमों का पालन करना बड़ा शुभ माना गया है। अगर इन नियमों का पालन ना किया जाए तो पूजा को अधूरा माना जाता है या तो पूजा का फल नहीं मिलता है। हमारे शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं जिनका पालन करना आवश्यक माना गया है।

जैसे पूजा करते समय सिर को ढंककर रखना, साफ और शुद्ध कपड़े पहनना, दिशा का ध्यान रखना और सबसे जरूरी आसन पर बैठकर पूजा करना। कई बार लोग बिना आसन के ही पूजा करने लगते है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है?

पूजा के समय आसन पर बैठना क्यों जरूरी माना जाता है?

1. आसन बिछाकर पूजा करने से देवी देवताओं के प्रति सम्मान प्रकट होता है और पूजा पूर्ण मानी जाती है।

2. आसन पर बैठकर अनुष्ठान करने से ज्ञान, सौभाग्य, शांति, धन और सिद्धि की प्राप्ति होती है।

3. आसन पर बैठकर पूजा करने से हमारे मन में भी अनुष्ठान या पूजा के प्रति गंभीरता आती है।

4. आसन पर बैठकर पूजा करने से हमारे मन में श्रद्धा, पवित्रता और धार्मिकता का भाव जन्मता है।

5. आसन पर बैठकर पूजा करने से शरीर आरामदायक स्थिति में रहता है। लंबे अनुष्ठान के लिए बैठते हैं तो आसन से शारीरिक आराम मिलता है।

6. आसन पर बैठकर पूजा करने से पूजा में ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

7. आसन पर बैठकर पूजा करने वाला व्यक्ति अनुष्ठान के दौरान शारीरिक और आध्यात्मिक स्वच्छता की स्थिति बनाए रखता है और पूजा में उसका मन भी लगा रहता है।

8. आसन पर बैठकर पूजा करने से व्यक्ति के मन में भारतीय संस्कृति और परंपरा से एक जुड़ाव महसूस होता है।

9. आसन पर बैठकर पूजा-अर्चना करने से पृथ्वी और आकाश की ऊर्जा के बीच संतुलन रहकर यह हमारे शरीर और मन को शांत करता है। इससे मन एकाग्र रहता है।

10. यह भी कहते हैं कि पृथ्वी में चुंबकीय बल है। जब कोई व्यक्ति मंत्रों के साथ पूजा करता है तो उसके अंदर एक सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। यदि उसने कोई आसन नहीं रखा है तो यह ऊर्जा पृथ्वी में समा जाती है और उसको कोई लाभ नहीं मिलता है।

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