Birth of Lord Shiva: भगवान शिव को हिंदू धर्म में सबसे प्राचीन और रहस्यमयी देवताओं में माना जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर शिव जी के माता-पिता कौन थे? क्या उनका भी जन्म हुआ था, जैसे अन्य देवताओं का हुआ? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें सबसे प्राचीन ग्रंथों वेदों और उपनिषदों की ओर देखना पड़ता है।
चारों वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद हिंदू धर्म के सबसे पुराने ग्रंथ माने जाते हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इनमें कहीं भी भगवान शिव के माता-पिता या उनके जन्म के बारे में सीधा उल्लेख नहीं मिलता। हालांकि, वेदों में कई ऐसे मंत्र हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि शिव कोई सामान्य जन्म लेने वाले देवता नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी शक्ति हैं जो सृष्टि से भी परे है।
यजुर्वेद के श्री रुद्रम में एक प्रसिद्ध मंत्र मिलता है "नमो भूतानां पतये नमो" इसका अर्थ है सभी प्राणियों के स्वामी को नमस्कार। जो संपूर्ण सृष्टि का स्वामी है, उसे सामान्य जन्म लेने वाला नहीं माना जाता।
ऋग्वेद (2.33) के रुद्र सूक्त में कहा गया है "नमस्ते अस्तु भगवन् विश्वेश्वराय" अर्थ: हे समस्त विश्व के ईश्वर, आपको नमस्कार। विश्वेश्वर शब्द यह दर्शाता है कि शिव सृष्टि से ऊपर और पहले से मौजूद हैं।
श्वेताश्वतर उपनिषद, जिसे वेदों का ही भाग माना जाता है, इस विषय पर सबसे स्पष्ट जानकारी देता है "न तस्य कश्चित् जनिता न चाधिपः" अर्थ: न तो उसका कोई जन्म देने वाला है और न ही कोई उसका स्वामी है। यही पंक्ति सबसे मजबूत आधार मानी जाती है यह साबित करने के लिए कि भगवान शिव “अजन्मा” हैं।
अगर शास्त्रों के आधार पर देखा जाए, तो भगवान शिव का कोई जन्म नहीं हुआ और न ही उनके माता-पिता का कोई उल्लेख मिलता है। वे सृष्टि के आरंभ से पहले से मौजूद एक अनंत और असीम शक्ति हैं। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि भगवान शिव अजन्मा हैं, और जब जन्म ही नहीं हुआ, तो माता-पिता का सवाल भी नहीं उठता।