शब-ए-बारात (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

मुसलमान क्यों मनाते हैं 'शब-ए-बारात', क्या है इस पर्व का ख़ास महत्व, इस त्योहार की सही तारीख़ भी जानिए

शब-ए-बारात इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे पूरी दुनिया के मुसलमान पूरी इबादत के साथ मनाते हैं। इस बार 13 फरवरी शब-ए-बारात का पर्व मनाया जाएगा।

सीमा कुमारी

Shab-e-Barat 2025: शब-ए-बारात इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे पूरी दुनिया के मुसलमान पूरी इबादत के साथ मनाते हैं। यह पर्व इस्लामिक कैलेंडर के शाबान महीने की 15वीं रात को मनाया जाता है। इस बार 13 फरवरी शब-ए-बारात का पर्व मनाया जाएगा।

आपको बता दें, शब-ए-बारात चंद्रमा देखने के बाद मनाया जाता है, हालांकि अधिकांश इस्लामिक त्योहारों की तिथियां चंद्रमा दिखने के बाद ही घोषित और सेलिब्रेट की जाती हैं। शब-ए-बारात कोई अपवाद नहीं है। आइए जानते है शब-ए-बारात पर्व से जुड़ी बातें-

इस तारीख को मनाई जाएगी शब-ए-बारात

इस्लामिक कैलेंडर अनुसार, इस वर्ष शब-ए-बारात 13 फरवरी, 2025, गुरुवार, को मनाई जाएगी। विभिन्न धार्मिक संगठनों ने घोषणा की है कि 29वें रजब के पूरा होने के बाद, 30 जनवरी, 2025 को चाँद देखा गया। यद्यपि राजनपुर, भुजपाल और गुजरात सहित पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में, उस दिन चांद दिखाई नहीं दिया था।

इसके बावजूद, अन्य क्षेत्रों में चांद देखे जाने की सूचना भेज दी गई थी। इसकी पुष्टि के बाद 31 जनवरी को शाबान का पहला दिन घोषित किया गया और इसके आधार पर 13 फरवरी की शाम को विशेष प्रार्थना के साथ शब-ए-बारात मनाई जाएगी।

शब-ए-बारात की रात कैसे मनाते हैं मुसलमान?

मुसलमान शब-ए-बारात को पूरी रात जागकर इबादत करते हैं। इस रात की विशेषता है कि महिलाएं अपने घरों में रहकर प्रार्थना करती हैं और पुरुष मस्जिदों में जाकर सामूहिक रूप से इबादत करते हैं।

इस दिन को खासतौर पर अल्लाह से माफी और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजा-अर्चना के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा, इस दिन मुसलमान भाई बहन रोजा भी रखते हैं, जो कि एक नफिल रोजा होता है, यानी इसे रखना अनिवार्य नहीं है, लेकिन लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार इसे रखते हैं।

शब-ए-बारात के दिन मुसलमान अपने मृत पितरों के कब्रों पर भी जाते हैं और वहां साफ-सफाई करते हैं, फूल चढ़ाते हैं, अगरबत्ती जलाते हैं और उनके लिए दुआ करते हैं। इस दिन मुसलमानों के बीच सामूहिक रूप से जकात दी जाती है, ताकि गरीबों और जरूरतमंदों की मदद की जा सके।

शब-ए-बारात की रात का विशेष माहौल

शब-ए-बारात की रात को मुसलमान अपने घरों में मोमबत्तियां और रंग-बिरंगी लाइटें जलाते हैं, जो इस रात के पवित्र और विशेष माहौल को और भी खूबसूरत बना देती हैं। इसके अलावा, इस रात को विशेष पकवान भी तैयार किए जाते हैं, और लोग एक-दूसरे को मिठाइयां और ताजे पकवानों से तवज्जो देते हैं। इस दिन नए कपड़े पहनने की भी परंपरा है और मस्जिदों में सामूहिक प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं।

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