अगहन शिवरात्रि पर बन रहे हैं कई शुभ योग (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

आज है मासिक शिवरात्रि, गौरीशंकर की कृपा के लिए इस मुहूर्त में करें पूजा, चढ़ाएं ये विशेष भोग

Masik Shivratri 2025 Significance:अगहन माह में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाने का एक बेहद शुभ अवसर होता है।

सीमा कुमारी

Masik Shivratri Ke Upay: आज 18 नवंबर को अगहन महीने की मासिक शिवरात्रि व्रत रखी जा रही है। आपको बता दें, प्रदोष व्रत की तरह मासिक शिवरात्रि भी भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए समर्पित है। यह व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है।

इस शुभ तिथि पर मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। अगहन माह में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाने का एक बेहद शुभ अवसर होता है, तो ऐसे में आइए इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।

ये है अगहन शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, अगहन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि आज 18 नवंबर को सुबह 07 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 19 नवंबर को सुबह 09 बजकर 43 मिनट पर चतुर्दशी तिथि समाप्त होगी। भगवान शिव की पूजा मासिक शिवरात्रि को निशा काल में होती है। इसके लिए आज 18 नवंबर को अगहन महीने की मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। इस दिन निशा काल में पूजा का समय देर रात 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक है।

अगहन शिवरात्रि पर बन रहे हैं कई शुभ योग

ज्योतिषियों की मानें तो अगहन शिवरात्रि पर आयुष्मान और सौभाग्य योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त और स्वाति नक्षत्र का योग बनेगा। इस दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक को अक्ष फल मिलेगा।

पंचांग

सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 49 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 28 मिनट पर ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 02 मिनट से 05 बजकर 56 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 55 मिनट से 02 बजकर 38 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 28 मिनट से 05 बजकर 55 मिनट तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक

मासिक शिवरात्रि पूजा विधि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें।
  • साफ कपड़े पहनें।
  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  •  शिवलिंग का सबसे पहले जल और फिर पंचामृत से अभिषेक करें।
  • भगवान शिव को बिल्व पत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, अक्षत, और सफेद फूल चढ़ाएं।
  • माता पार्वती को सुहाग की सामग्री, लाल वस्त्र और फूल चढ़ाएं।
  • शिव जी के वैदिक मंत्रों का जप करें।
  • शिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
  • निशिता काल के समय में भी पूजा जरूर करें और अगले दिन सुबह व्रत का पारण करें।

 शिव भोग -

भगवान शिव के प्रिय भोग - सफेद मिठाई और खीर। भगवान शिव के प्रिय फूल - आक के फूल

भगवान शिव पूजन मंत्र

ॐ नमः शिवाय ॥ शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

झमाझम बारिश से थमी दिल्ली-NCR की रफ्तार! घुटनों तक जलभराव, IMD का रेड अलर्ट, उड़ानों पर भी पड़ा असर

अगर प्रशासन चाहता तो न उजड़ता कुणाल का परिवार! पहले भी हो चुके हैं 13 सुसाइड, जानें खवड्या पहाड़ी का खौफनाक सच

राहुल गांधी का महाराष्ट्र पर फोकस, पुणे के बाद अब नासिक का रुख, 2 सितंबर को प्रशिक्षण शिविर को करेंगे संबोधित

ऑपरेशन सिंदूर के बाद वीजा रद्द, महीनों अटकी रहीं शादियां; अब 150 पाकिस्तानी दुल्हनों की भारत में हुई एंट्री

CM विजय के परिसीमन बयान के बीच SC के जस्टिस केएम जोसेफ की बड़ी चेतावनी, बोले- दक्षिण के वोट का मूल्य घटेगा