हरतालिका तीज की पूजा सामग्री लिस्ट (सौ.जैमिनी)
धर्म

Puja Samagri: हरतालिका तीज की पूजा में क्या-क्या होना जरूरी? एक चीज भी न छूटे, नोट कर लें पूरी लिस्ट

Hartalika Teej Puja Items: हरतालिका तीज व्रत में पूजा की थाली में रखी जाने वाली सामग्री का भी विशेष महत्व माना जाता है। यहां जानिए हरतालिका तीज की पूजा में किन-किन सामग्रियों की जरूरत होती है।

सीमा कुमारी

Hartalika Teej Puja Mein Kya Chahiye: पति की लंबी आयु और मनचाहे वर की कामना के लिए रखा जाने वाला हरतालिका तीज इस बार 14 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शुभ मुहूर्त में शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की पूजा करने से सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

हरतालिका तीज सिर्फ कठिन व्रत ही नहीं, बल्कि इस व्रत में पूजा की थाली में रखी जाने वाली सामग्री का भी विशेष महत्व माना जाता है। यहां जानिए हरतालिका तीज की पूजा में किन-किन सामग्रियों की जरूरत होती है।

हरतालिका तीज की पूजा सामग्री लिस्ट

  • भगवान शिव, मां पार्वती और गणेशजी की मूर्ति बनाने के लिए गीली मिट्टी या बनी हुई प्रतिमा

  • भगवान के वस्त्र

  • मिट्टी के दीपक

  • देवी पार्वती के श्रृंगार का सामान

  • लकड़ी की चौकी

  • लाल या पीला वस्त्र

  • मिट्टी का कलश और उसका ढक्कन

  • पानी वाला नारियल

  • जनेऊ

  • गुलाल

  • सिंदूर

  • घी

  • शहद

  • भस्म

  • रोली

  • लौंग

  • इलायची

  • चावल

  • कलावा

  • सुपारी

  • कपूर

  • धूपबत्ती

  • दीपक के लिए रूई की बत्ती

हरतालिका तीज व्रत से जुड़े क्या है नियम?

हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन प्रदोष काल में भगवान शंकर और माता पार्वती की रेत या बालू से मूर्ति बनाई जाती हैं।

फिर उन मूर्तियों की विधि विधान पूजा की जाती है और साथ ही कथा भी सुनी जाती है। इस पूजा में शिव-पार्वती को प्रसाद के रूप में फल, खीर और हलवा का भोग लगाने की भी खास परंपरा है। पूजा के समय सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी वस्तुएं रखकर माता पार्वती को चढ़ायी जाती हैं।

साथ ही शिव जी को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है। पूजा के बाद में सुहाग सामग्री सास के चरण स्पर्श करने के बाद किसी ब्राह्मणी और ब्राह्मण को दान कर दी जाती है। इस व्रत में रात्रि जागरण करने का खास महत्व माना जाता है।

व्रत का पारण दूसरे दिन सूर्योदय के बाद होता है। व्रत पारण से पहले एक बार फिर से महिलाएं शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करती हैं और आरती के बाद माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाती हैं और वही सिंदूर अपनी मांग में भी भरती हैं। इसके बाद प्रसाद में चढ़ाए गए भीगे चने, ककड़ी और हलवे का प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलती है।

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