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वैशाख महीने के अंतिम प्रदोष व्रत त्रिपुष्कर योग का अद्भुत संयोग, विधिवत पूजा से बरसेगी शिवजी की कृपा!

Vaishakh Pradosh Vrat: वैशाख महीने के अंतिम प्रदोष व्रत पर त्रिपुष्कर योग का विशेष संयोग बन रहा है। इस शुभ अवसर पर विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।

सीमा कुमारी

Pradosh Vrat Tripushkar Yog Significance: कल, 28 अप्रैल 2026 को वैशाख महीने के आखिरी प्रदोष व्रत है। मंगलवार का दिन होने से इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। शिव कृपा के लिए प्रदोष व्रत सनातन धर्म में बड़ा महत्व रखता है। मान्यता है कि जो लोग इस दिन सच्चे मन और श्रद्धा से व्रत रखते हैं, उनके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

प्रदोष व्रत की क्या शुभ तिथि

पंचांग के अनुसार, मंगलवार 28 अप्रैल को वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शाम 06:51 से शुरू होगी और 29 अप्रैल शाम 07:51 तक रहेगी. प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में पूजा का महत्व है, इसलिए 28 अप्रैल को ही व्रत-पूजा की जाएगी ।

शिव कृपा पाने के लिए करें ये काम

  • कर्ज और रोग मुक्ति के लिए

मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। जिसमें शिवजी के साथ ही हनुमान की पूजा का भी महत्व होता है। इसलिए इस दिन की गई पूजा और उपाय कर्ज और रोग मुक्ति के लिए भी श्रेष्ठ मानी जाती है।

  • शिव कृपा के लिए

प्रदोष व्रत (Vaishakh Pradosh Vrat)के दिन शिवलिंग पर तिल का तेल अर्पित करना शुभ होता है। मान्यता है कि इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और पाप-दोष दूर होते है।

  • आर्थिक लाभ के लिए

धन आदि से जुड़ी समस्या से परेशान हैं तो, भौम प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पर एक मुट्ठी साबुत कच्चा चावल अर्पित करें. इस उपाय से धन लाभ के योग बनते है।

  • संतान सुख के लिए

संतान की इच्छा रखने वाले दंपति प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर गेहूं और धतूरा अर्पित करें और शिवजी से संतान सुख की कामना करें. मान्यता है कि, इस उपाय से महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की कामना पूर्ण करते है।

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और प्रदोषकाल

पंचांग के अनुसार, 28 को प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ समय शाम 6 बजकर 54 मिनट से रात 9 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। यही प्रदोष काल होता है, जिसमें भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दौरान की गई आराधना से विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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त्रिपुष्कर योग में बन रहा खास संयोग

ज्योतिषयों के अनुसार, इस बार भौम प्रदोष व्रत पर एक बेहद शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन त्रिपुष्कर योग सुबह 5 बजकर 43 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों का तीन गुना फल मिलता है।

इसके साथ ही दिन में व्याघात योग भी रहेगा, जो रात 9 बजकर 4 मिनट तक प्रभावी रहेगा और उसके बाद हर्षण योग शुरू होगा। नक्षत्र की बात करें तो उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रात 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगा, फिर हस्त नक्षत्र का आरंभ होगा।

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