Vaishakh Amavasya 2026 Katha:आज वैशाख महीने की अमावस्या है। हिंदू धर्म में वैशाख अमावस्या का विशेष महत्व है। यह शुभ तिथि पितरों की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, दान आदि करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। हालांकि, पितरों की पूजा का आशीर्वाद आपको तभी मिलता है जब आप इस दिन पूजन के दौरान व्रत कथा का पाठ या श्रवण करते हैं। आइए ऐसे में जान लेते हैं वैशाख अमावस्या की व्रत कथा क्या है।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में धर्मवर्ण नाम का एक ब्राह्मण था, जो अत्यंत धर्मात्मा था। एक सिद्ध पुरुष से कलयुग में विष्णु स्मरण का महत्व सुनकर उसने संसार छोड़ सन्यास ले लिया और भगवान की भक्ति में लीन हो गया।
एक बार ध्यान के दौरान धर्मवर्ण का सूक्ष्म शरीर पितृलोक पहुंच गया। वहां उसने देखा कि उसके पूर्वज बेहद कष्ट में हैं।
जब धर्मवर्ण ने अपने पितरों के दुखी होने का कारण पूछा, तो उन्होंने कहा, "तुम्हारे सन्यासी हो जाने के कारण अब हमारा पिंडदान करने वाला कोई नहीं है। वंश परंपरा टूटने से हमें यह कष्ट भोगना पड़ रहा है"। उपाय और सुधार: पितरों ने धर्मवर्ण को पुनः गृहस्थ जीवन में लौटने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यदि वह वैशाख अमावस्या को विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण करे, तो उन्हें मुक्ति मिल जाएगी।
पितरों की मुक्ति: धर्मवर्ण ने पितृ लोक से लौटकर सन्यास त्याग दिया और पुनः गृहस्थ जीवन अपनाकर वैशाख अमावस्या पर विधिपूर्वक तर्पण किया, जिससे उसके पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त हुआ।
यह कथा बताती है कि वैशाख अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान, दान और पितरों का तर्पण करने से पूर्वज तृप्त होकर वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यह दिन पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष माना जाता है।