इंदिरा एकादशी (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

पितृ दोष से मुक्ति के लिए इंदिरा एकादशी पर करें ये आसान उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद!

Indira Ekadashi upay:अगर आप पितृ दोष से परेशान हैं, तो इंदिरा एकादशी का दिन आपके लिए बहुत शुभ हो सकता है। इस दिन कुछ विशेष उपाय करके आप पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है।

सीमा कुमारी

Indira Ekadashi ke upay: 17 सितंबर को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। शास्त्रों में पितृ पक्ष में आने वाली इंदिर एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ पितरों की भी पूजा करने का विधान है। वहीं इस एकादशी के दिन कुछ उपायों को करने से पितरों की विशेष कृपा बरसती है। ऐसे में आइए जानते है इंदिरा एकादशी के दिन की जाने वाली विशेष उपायों के बारे में-

इंदिरा एकादशी पर पितृ दोष से मुक्ति के लिए क्या करें?

अगर आप पितृ दोष से परेशान हैं, तो इंदिरा एकादशी का दिन आपके लिए बहुत शुभ हो सकता है। इस दिन कुछ विशेष उपाय करके आप पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते है-

व्रत और पूजा

इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। भगवान शालिग्राम और भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा में तुलसी दल, फूल, फल और पंचामृत जरूर चढ़ाएं।

श्राद्ध और तर्पण

इस दिन भगवान विष्णु के साथ पितरों का श्राद्ध करना बहुत ही पुण्यकारी माना जाता है। अगर आप अपने पितरों का श्राद्ध करने में सक्षम हैं, तो किसी योग्य ब्राह्मण से विधिपूर्वक श्राद्ध करवाएं। अगर ऐसा संभव न हो तो तर्पण (जल अर्पित करना) कर सकते हैं।

ब्राह्मणों को भोजन कराएं

पितरों की शांति के लिए इस दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना बहुत शुभ होता है।भोजन में खीर और पूड़ी जैसी चीजें शामिल करें।

दान-पुण्य

इस दिन अनाज, कपड़े या धन का दान करना भी बहुत लाभकारी होता है। गाय को चारा खिलाना भी पुण्य का काम है।

पितृ स्तोत्र का पाठ

अगर आपको पितृ दोष महसूस होता है, तो इंदिरा एकादशी के दिन पितृ स्तोत्र या गरुड़ पुराण का पाठ करना बहुत ही फलदायी होता है। यह पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है।

जानिए क्या है इंदिरा एकादशी व्रत की महिमा

सनातन धर्म में इंदिरा एकादशी व्रत की महिमा अपरंपार है। यह एकादशी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आती है और इसे पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकमात्र एकादशी के रूप में जाना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। यह भी कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से पितरों को स्वर्गलोक में स्थान प्राप्त होता है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते है।

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