संत कबीर के दोहे (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

सफल जीवन के मूलमंत्र हैं संत कबीर के ये दोहे, अपने जीवन में अपना कर तो देखें

संत कबीर दास जी ने अपने दोहों और विचारों के जरिए जनमानस को प्रभावित किया था। आज भी उनके दोहे जीवन का सच बयां करती है, इन दोहों में सुखी जिंदगी और सफलता का राज छिपा है।

दीपिका पाल

हिंदी साहित्य के जाने माने महान कवि 'संत कबीर दास जी' (Sant Kabirdas Jayanti 2024) की आज 647वीं वर्ष गांठ मनाई जा रही है। आपको जानकारी के लिए बता दें, संत कबीरदास जी हिंदी साहित्य के प्रमुख कवियों में से एक थे।

कबीरदास जी ने समाज में फैले अंधविश्वास, रूढ़िवादी परंपराओं और पाखंड का विरोध करते हुए इंसानियत को सबसे ऊपर रखा।

जानिए संत कबीर के अनमोल विचार

संत कबीर दास जी ने अपने दोहों और विचारों के जरिए जनमानस को प्रभावित किया था। आज भी उनके दोहे जीवन का सच बयां करती है, इन दोहों में सुखी जिंदगी और सफलता का राज छिपा है। ऐसे में आज संत कबीर दास जी जयंती के उपलक्ष्य में आइए जानें उनके अनमोल वचन के बारे में-

1. दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय॥

कबीर जी इस दोहे के माध्यम से बताना चाहते हैं कि हर इंसान दुख में भगवान को याद करता है, लेकिन सुख के समय में उसे ईश्वर की याद नहीं रहती है। अगर व्यक्ति सुख में भी ईश्वर को याद करें, तो जीवन में कभी दुख नहीं आएगा।

2. बड़ा भया तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर,

पंछी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।।

इस दोहे के माध्यम से कबीर जी कहते हैं कि बड़ा होने से कोई फायदा तब तक नहीं है। जब तक आपमें बड़ों वाला गुण नहीं है। खजूर का पेड़ बड़ा हो जाता है, लेकिन किसी राहगीर को छाया नहीं मिलती है। फल की बात करना व्यर्थ है। व्यक्ति को जीवन में गुणवान बनना चाहिए।

3. बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिल्या कोई,

जो मन देखा अपना, तो मुझसे बुरा ना कोई।।

लोग आजकल दूसरों की बुराई और अपनी तारीफ करने में लगे रहते हैं। इस बारे में कबीर जी कहते हैं कि लोग दूसरे में बुराई ढूंढते हैं, लेकिन जब खुद को देखता है, तो उसे पता चलता है कि उससे अधिक बुरा कोई नहीं है।

4. ऐसी वाणी बोलिये, मन का आप खोये,

औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होये।।

कबीर जी इस दोहे के माध्यम से कहना चाहते हैं कि व्यक्ति को मधुरभाषी होना चाहिए। इससे व्यक्ति खुद भी प्रसन्नचित रहता है। मधुर वाणी से अन्य लोग भी खुश रहते हैं।

5. काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।

पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥

कबीर दास जी कहते हैं कि लोग आज का काम कल पर टालते हैं। उन्हें पता नहीं है कि अगले पल का मालिक परम पिता परमेश्वर है। कल क्या होगा, ये तो केवल ईश्वर को पता है। इसके लिए कल का काम आज और आज का काम अभी करने में भलाई है। लेखिका- सीमा कुमारी

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